जानिए आखिर कैसे 3 महीने पुरानी पार्टी ने दार्जिलिंग निकाय चुनाव में सबको चौंकाया

कोलकाता, 03 मार्च। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में बुधवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यहां महज 3 महीने पुरानी राजनीतिक पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की है। उत्तरी बंगाल को राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जाता है। पूरे पश्चिम बंगाल में एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस की लहर चल रही है तो ऐसे समय में 3 महीने पहले बने राजनीतिक दल हाम्रो पार्टी ने जबरदस्त जीत हर किसी को चौंका रही है।

दार्जिलिंग में जबरदस्त जीत

दार्जिलिंग में जबरदस्त जीत

उत्तरी पश्चिम बंगाल में दार्जीलिंग में खासकर भारतीय जनता पार्टी की पकड़ माना जाती है। लेकिन इस बार हाम्रो पार्टी ने यहां जीत दर्ज की है। हाम्रो पार्टी का गठन पिछले साल 25 नवंबर को हुआ था। उसने दार्जिलिंग निकाय चुनाव में 32 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी ने यहां टीएमसी और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को मात दी है, जिन्होंने बाकी की 108 सीटों पर जबरदस्त जीत दर्ज की है।

विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका

विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका

हाम्रो पार्टी की जीत को मुख्य विपक्षी दलों के साथ टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सत्ता में आने के बाद से ही टीएमसी यहां कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी है। यही नहीं प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी जिस तरह से अहम विपक्षी दल के रूप में सामने आई है उसे भी यहां पर निराशा हाथ लगी है। माना जा रहा है कि इन नतीजों का असर गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्टेशन के चुनाव पर भी साफ दिखेगा, जोकि जल्द ही पश्चिमी बंगाल में होने वाला है।

32 में से 19 की जीत

32 में से 19 की जीत

हाम्रो पार्टी की बात करें तो उसने इस चुनाव में 32 वार्ड पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमे 19 महिला उम्मीदवार थीं। जिसमे मुख्य रूप से शिक्षिका, एक्टिविस्ट, टूर गाइड, अकेली मां, टैक्सी ड्राइवर, घर पर रहने वाले पिता और कुछ स्थानीय बेरोजगार शामिल हैं। पार्टी ने बड़े नेता जैसे बिमल गुरुंग, अनित थापा को मात दी है। हालांकि हाम्रो पार्टी के मुखिया अजय एडवर्ड्स भी यहां वार्ड नंबर 22 से चुनाव हार गए।

बड़े-बड़े दिग्गज हारे

बड़े-बड़े दिग्गज हारे

यहां रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से मतदान हुए, जिसमे 53.79 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। दार्जिलिंग से भाजपा के सांसद राजू बिस्ता और विधायक नीरज जिंबा भी इस बार चुनाव में लोगों के घर-घर जाकर वोट मांग रहे थे। जबकि गुरुंग, थापा और एडवर्ड्स ने भी सड़क पर उतरकर चुनाव प्रचार किया था। लेकिन चुनाव के अंतिम चरण में एडवर्ड की तबीयत बिगड़ गई जिसकी वजह से वह प्रचार करने के लिए बाहर नहीं निकल सके।

क्या है पार्टी के वादे

क्या है पार्टी के वादे

गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले अजय एडवर्ड ने हाम्रो पार्टी की शुरुआत पिछले ही साल की थी। वह समाजसेवी हैं, वह खुद अपना रेस्टोरेंट भी चलाते हैं, साथ ही एडवर्ड फाउंडेशन को चलाते हैं जोकि लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पिछड़े तबके के लिए काम करता है। पार्टी का नाम हाम्रो पार्टी है जिसका मतलब होता है हमारी पार्टी। इस नाम को सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर लोगों की राय लेने के बाद रखा गया था। हाम्रो पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र की बात करें तो इसमे वादा किया गया है कि वह छात्रों को स्कॉलरशिप देगी, कोंचिंग सेंटर खोलेगी। पर्यटन को बढ़ाने के लिए रोजगार सृजन करेगी, रात्रि बाजार को बढ़ाएगी और साप्ताहिक बाजार की शुरुआत पर्यटकों के लिए करेगी।

बड़े राजनीतिक बदलाव के आसार

बड़े राजनीतिक बदलाव के आसार

दार्जिलिंग में हाम्रो पार्टी की जीत को राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही इसके संकेत दे दिए हैं कि जीटीए के चुनाव जल्द ही निकाय चुनाव के बाद होंगे। बता दें कि जीटीए के पास मुख्य रूप से प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यकारी शक्तिया हैं। भाजपा इस क्षेत्र में 2009 से ही चुनाव जीतती आ रही है। टीएमसी यहां पर अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रही है। लेकिन टीएमसी को विधानसभा के बाद निकाय चुनाव में निराशा ही हाथ लगी। चुनाव से पहले हाम्रो पार्टी ने कहा था कि वह किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और किसी महिला के हाथ में ही निकाय को चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

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