दोतरफा घिरी ममता सरकार, आंदोलित डॉक्टरों के बाद CBI ने भी कसा शिकंजा

कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा कदम उठाते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और ताला पुलिस स्टेशन के एसएचओ अभिजीत मंडल को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने इन दोनों पर एफआईआर दर्ज करने में देरी करने और अहम सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया है।

अहम बात है कि इस पूरी घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। इन डॉक्टरों को ममता बनर्जी ने मुलाकात के लिए बुलाया था। लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट तौर पर इस मुलाकात से इनकार कर दिया क्योंकि ममता सरकार ने उन्हें इस मीटिंग को रिकॉर्ड करने से मना कर दिया।

mamata banerjee

चाय नहीं न्याय चाहिए

यही नहीं डॉक्टरों ने ममता सरकार की चाय तक पीने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि हमें न्याय चाहिए, आपकी चाय नहीं। आरजी कर मामले में ममता सरकार एक तरफ जहां आंदोलनकारी डॉक्टरों के सामने झुकी नजर आ रही है तो दूसरी तरफ सीबीआई लगातार इस मामले में शिकंजा कस रही है।

जिस तरह से सीबीआई ने आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल की हिरासत की मांग की है और संगीन आरोप लगाए हैं, उससे साफ है कि इस पूरे मामले में ममता सरकार घिरती नजर आ रही है।

सीबीआई का संगीन आरोप

सीबीआई ने शनिवार शाम को कोर्ट में पेश की गई याचिका में घोष की हिरासत की मांग की। सीबीआई का आरोप है कि घोष ने एफआईआर में देरी करने के लिए दूसरों के साथ मिलकर साजिश रची, जिससे महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो गए।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि घोष ने मुख्य आरोपी और अन्य सह-आरोपियों को बचाने के लिए दुर्भावनापूर्ण इरादे से काम किया।

मामले में बड़ा मोड़

सीबीआई की ओर से उठाया गया यह कदम इस पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 14 सितंबर को सियालदह में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत के समक्ष सीबीआई ने अपील की थी।

जिसका मुख्य रूप से उद्देश्यआरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मामले में बलात्कार और हत्या के संबंध में घोष को हिरासत में लेना है। यह इसलिए भी बड़ा कदम है क्योंकि इस पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद यह पहली बार है कि सीबीआई ने किसी दूसरे व्यक्ति की हिरासत मांगी है।

सीबीआई का संगीन आरोप

सीबीआई की विशेष अपराध इकाई के जांच अधिकारी ने अपनी याचिका में कहा कि घोष ने अन्य लोगों के साथ मिलकर एफआईआर दर्ज करने में देरी की, जिसके परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो गए।

वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान पीड़िता की मृत्यु की तुरंत घोषणा न करके जानबूझकर सबूत नष्ट करने में डॉ. संदीप घोष की संलिप्तता सामने आई है।

याचिका में आगे बताया गया है कि यह देरी इस जघन्य अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने की साजिश का हिस्सा थी।

याचिका के एक हिस्से में लिखा है, जांच प्रगति पर है, जिसमें 13 अगस्त, 2024 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन का भी उल्लेख है।अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 64/103(1) के तहत सीबीआई ने मामला फिर से दर्ज किया है।

पहले से ही दूसरे मामल में हिरासत में

घोष पहले से ही एक अलग वित्तीय भ्रष्टाचार मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई का मानना ​​है कि इस जांच को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। उनकी हिरासत की मांग करने वाले अधिकारी ने कहा कि आगे की जांच के लिए घोष से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

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