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पूर्व चीफ सेक्रेटरी और टीएमसी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर बंगाल BJP में मतभेद

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कोलकाता, 3 जून: पश्चिम बंगाल के पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय और टीएमसी के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से हुई कार्रवाई को लेकर प्रदेश भाजपा के नेताओं में ही मतभेद उभर आए हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि इसके चलते राज्य में जन भावना पार्टी के खिलाफ चली गई है। जबकि, पार्टी में नेताओं का ऐसा वर्ग भी है जो दोनों मुद्दों पर केंद्र सरकार के कदम के समर्थन में डटा हुआ है। गौरतलब है कि बंदोपाध्याय का मसला अभी शांत नहीं हुआ है और इसको लेकर केंद्र और बंगाल सरकार फिर से आमने-सामने है।

बंगाल भाजपा नेताओं में मतभेद-रिपोर्ट

बंगाल भाजपा नेताओं में मतभेद-रिपोर्ट

केंद्र ने यास चक्रवात का जायजा लेने पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक से बिना इजाजत गायब रहने के लिए राज्य के पूर्व मुख्य सचिव बंदोपाध्याय को डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस थमाया है। इस मामले में उनके खिलाफ कानूनी तौर पर आरोप बड़े ही गंभीर हैं, जिसमें दो साल तक की सजा का प्रावधान है। उससे पहले सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में टीएमसी सरकार के दो मंत्रियों समेत चार नेताओं को गिरफ्तार किया था। हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक राज्य में ममता बनर्जी की अगुवाई में तीसरी बार लगातार सरकार बनने के महीने भर के अंदर इस तरह की कार्रवाई ने भाजपा नेताओं के बीच ही मतभेद पैदा कर दिया है। कुछ नेता इन कार्रवाइयों को लेकर सहमत नहीं हैं और उनका मानना है कि इसके चलते जन भावना पार्टी के खिलाफ हो गई है।

'टीएमसी नेताओं को जेल में डालना लोगों को पसंद नहीं आया'

'टीएमसी नेताओं को जेल में डालना लोगों को पसंद नहीं आया'

प्रदेश भाजपा के एक नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि, 'शपथ लेने के कुछ ही दिन बाद वरिष्ठ टीएमसी नेताओं को जेल में डालना लोगों को पसंद नहीं आया है। कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हमारे केंद्रीय नेतृत्व ने कहा है कि बंदोपाध्याय मामले में सार्वजनिक रूप से और मीडिया से सिर्फ विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ही बोलेंगे। हम चुप हैं।' गौरतलब है कि 2016 के नारदा स्टिंग घोटाले में सीबीआई ने मंत्रियों फिरहाद हकीम और सुब्रता मुखर्जी के अलावा टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को 17 मई को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी।

'बंदोपाध्याय पर कार्रवाई से युवा नाकुश'

'बंदोपाध्याय पर कार्रवाई से युवा नाकुश'

बीजेपी के एक और नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है कि बंदोपाध्याय और उनके छोटे भाई अंजन जो कि जी24 घंटा के एडिटर थे, दोनों बंगाल में काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने कहा, 'वे एक गांव से निकले और ऊंचा मुकाम हासिल किया। बंगाल के लोग खासकर छात्र और युवा इसे बंगाली ब्यूरोक्रेट के उत्पीड़न की तौर पर देख रहे हैं। ज्यादातर सोशल मीडिया क्षेत्रीय राजनीति के संदेशों से भरे पड़े हैं। यह बाहरियों को बाहर करो वाली मुहिम को वापस लाने जैसा है, जो कि चुनाव के दौरान बनर्जी ने दिल्ली और हिंदी-भाषी राज्यों से आने वाले भाजपा के केंद्रीय नेताओं के लिए इस्तेमाल किया था।' अंजन बंदोपाध्याय की हाल ही में कोरोना से मौत हो गई थी।

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इस अभियान में लेफ्ट-लिबरल शामिल- बीजेपी नेता

इस अभियान में लेफ्ट-लिबरल शामिल- बीजेपी नेता

लेकिन, बीजेपी नेताओं का एक वर्ग इन दलीलों से इत्तेफाक नहीं रखता। मसलन, पार्टी नेता रितेश तिवारी ने आरोप लगाया है कि भाजपा के खिलाफ ताजा अभियान में 'वही लेफ्ट-लिबरल, इंटेलेक्चुअल्स और मीडिया का एक वर्ग शामिल है, जिसने चुनावों में टीएमसी को सपोर्ट किया था।' उन्होंने आरोप लगाया कि, 'इस मीडिया ने मंगलवार को केंद्र से जल जीवन मिशन के लिए बंगाल के वास्ते जारी हुए 7,000 करोड़ रुपये की रिपोर्ट नहीं दिया, जिसका कि मोदी ने चुनाव के दौरान वादा किया था। हम चुनाव हार गए, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपना वादा निभाया, क्योंकि वह राजनीति को प्रशासन के साथ नहीं मिलाते हैं।'

English summary
Differences in Bengal BJP over action against former Chief Secretary Alapan Bandopadhyay and TMC leaders
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