'संवैधानिक रूप से अनुचित', बंगाल के गवर्नर ने TMC विधायकों की शपथ पर उठाए सवाल, राष्ट्रपति तक स्पीकर की शिकायत

पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में अपनी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे टीएमसी के दो विधायकों के शपथ ग्रहण को लेकर गतिरोध जारी है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस खुलकर स्पीकर के विरोध में आ गए हैं। उन्होंने कहा के विधायकों को स्पीकर द्वारा शपथ दिलाया जाना असंवैधानिक है। इसको लेकर गवर्नर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने राष्ट्रपति से स्पीकर की शिकायत भी की है।

बंगाल में सत्तारूढ़ दल टीएमसी के दो विधायकों की शपथ की प्रक्रिया में बदलाव के चलते विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी और राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। इस हफ्ते स्पीकर ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि सदन का कामकाज पूरी तरह से राज्यपाल पर निर्भर नहीं है।

Controversy over oath of TMC MLAs

इससे पहले स्पीकर ने राज्यपाल को निशाने पर लेते हुए एक बयान में कहा, "अगर कोई सोचता है कि हम असहाय हैं, तो वह (पुरुष/महिला) गलत है। विधानसभा असहाय नहीं है और सब कुछ राज्यपाल के हाथ में नहीं है। आप हम पर अपनी बात थोप नहीं सकते। नियम, कानून और संवैधानिक मानदंड है। हम सभी को उनका पालन करना होगा।"

क्या है विवाद
तृणमूल कांग्रेस के दो नवनिर्वाचित विधायकों ने बृहस्पतिवार को छठे दिन भी पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में धरना दिया। उन्होंने मांग की है कि उन्हें राजभवन के बजाय सदन में शपथ दिलाई जाए। राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने उन्हें राजभवन में शपथ के लिए आमंत्रित किया था। इस गतिरोध के बीच शुक्रवार शाम विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान तृणमूल विधायकों ने सदन में 'जय बांग्ला' का नारा लगाया।

वहीं गवर्नर सीवी आनंद बोस ने इससे पहले दोनों टीएमसी विधायकों को शपथ दिलाने के लिए डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी को नियुक्त किया था। लेकिन इसके बावजूद स्पीकर ने टीएमसी विधायकों को शपथ दिला थी। जिसको लेकर पूरा विवाद खड़ा गया। राज्यपाल ने स्पीकर की इस "कार्यवाही को संवैधानिक नुस्खे" की अवहेलना बताया और राज्यपाल को एक पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया।

बता दें कि इससे पहले बारानगर विधायक सायंतिका बंद्योपाध्याय और भागबंगोला विधायक रयात हुसैन सरकार ने 27 जून को धरना शुरू किया जो चार जुलाई को भी जारी रहा। दोनों विधायक आरोप लगा रहे थे कि विधानसभा उपचुनाव जीतने के बावजूद शपथ ग्रहण प्रक्रिया लंबित है, जिसके चलते वे निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में अपनी भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं।

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