कांग्रेस-लेफ्ट ने बंगाल में ममता बनर्जी को फिर से धूल चटाई, हल्दिया के एक चुनाव में TMC साफ
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को एक और झटका लगा है। कांग्रेस-लेफ्ट फ्रंट गठबंधन ने हल्दिया डॉक के एक चुनाव में उससे सभी 19 सीटें छीन ली हैं। यहां बीजेपी भी खाता नहीं खोल पाई है।

बंगाल में ममता बनर्जी को अपने ही गढ़ में फिर से मात मिली है। हल्दिया डॉक में हुए एक चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट गठबंधन ने मिलकर सत्ताधारी टीएमसी को खाता भी नहीं खोलने दिया है। टीएमसी ही नहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी को भी तगड़ा झटका लगा है और उसके सारे प्रत्याशी हार गए हैं। ममता बनर्जी के लिए राज्य में यह लगातार दूसरी नाकामी है। हाल ही में मुर्शिदाबाद जिले की सागरदिघी उपचुनाव में कांग्रेस गठबंधन ने उसे इस विधानसभा क्षेत्र से बेदखल कर दिया था, जबकि पार्टी वहां लगातार तीन बार से जीतती आ रही थी। ममता बनर्जी के लिए टेंशन की बात ये भी है कि पहले जहां उसे मुस्लिम बहुल क्षेत्र में झटका लगा। अब जिस जगह हारी है, वह भी उसका पुराना गढ़ है और पहले सारी की सारी सीटें उसी के पास थी।

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हल्दिया डॉक के चुनाव में टीएमसी का सफाया
बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के शायद 'ग्रह-नक्षत्र' ठीक नहीं चल रहे हैं। ममता बनर्जी की पार्टी को हाल ही में कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने मुर्शिदाबाद की सागरदिघी विधानसभा उपचुनाव में हराकर चौंका दिया था तो अब हल्दिया में हुए एक चुनाव इस गठबंधन ने टीएमसी का पूरी तरह से सफाया ही कर दिया है। कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने अबकी बार पूर्वी मिदनापुर जिले की हल्दिया डॉक इंस्टीट्यूट स्टीयरिंग कमेटी (HDISC) के चुनाव में ममता की पार्टी का पूरी तरह से पत्ता साफ कर दिया है।

एचडीआईएससी की सभी 19 सीटों पर हारी ममता की पार्टी
इस चुनाव में कांग्रेस-लेफ्ट गंठबंधन ने एचडीआईएससी की सभी 19 सीटों पर कब्जा कर लिया है और टीएमसी और बीजेपी के मजदूर संगठन यहां अपना खाता भी नहीं खोल पाए हैं। हल्दिया डॉक इंस्टीट्यूट स्टीयरिंग कमेटी में हुए पिछले चुनावों में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को सभी सीटें मिली थीं। एचडीआईएससी के चुनाव हर दो साल पर होते हैं और इसके मतदाताओं में हल्दिया डॉक के स्थायी कामगार और अधिकारी शामिल हैं।

सागरदिघी के बाद हल्दिया डॉक भी ममता के हाथ से निकला
सीपीएम के जिलाध्यक्ष निंरजन सिंघी का कहना है कि पिछले चुनावों में हमारा कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। इस बार वोटरों ने कांग्रेस के साथ हमारे गठबंधन के उम्मीदवारों का समर्थन करने का फैसला किया है। इससे पहले कांग्रेस ने टीएमसी से जो सागरदिघी विधानसभी की सीट छीनी थी, वह मुस्लिम-बहुल है। वहां 2011 से ही लगातार टीएमसी जीत रही थी। लेकिन, जब उसके सीटिंग विधायक के निधन के बाद उपचुनाव हुए तो ममता की महिमा भी पार्टी उम्मीदवार को नहीं जितवा सकी। हल्दिया डॉक में टीएमसी और बीजेपी दोनों ने ही सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।

13 साल बाद ढहा ममता का यह किला
हल्दिया डॉक के नतीजे आने वाले पंचायत चुनावों के लिहाज से टीएमसी, कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन और प्रमुख विपक्षी बीजेपी तीनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस चुनाव में कुल 737 वोटर थे, जिनमें से 694 ने वोट डाले। मुकाबला लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन, टीएमसी ट्रेड यूनियन और भारतीय मजदूर संघ (बीजेपी का संगठन) के बीच त्रिकोणीय था। उम्मीदवारों की कुल संख्या 58 थी। वैसे पिछले चुनाव में टीएमसी ने मैनेजमेंट कमेटी की सभी सीटें तक जीत ली थी, लेकिन, उपाध्यक्ष का पद लेफ्ट के हाथ लग गया था। हल्दिया डॉक चुनाव में 13 साल में ममता बनर्जी की पार्टी समर्थित संगठन की यह पहली हार है।

बंगाल में हवा का रुख बदल रहा है?
इस चुनावी जीत पर हल्दिया डॉक के वामपंथी संघ के एक प्रवक्ता ने कहा है कि जिस तरह की जीत मिली है, उससे पता चलता है कि हवा का रुख क्या है। कांग्रेस-लेफ्ट इसलिए गदगद है कि पूर्वी मिदनापुर को अभी टीएमसी और बीजेपी का गढ़ माना जाता है। लेकिन, पंचायत चुनावों से पहले हवा उनके पक्ष में बहने लगी है। हालांकि, टीएमसी से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका आने वाले निकाय चुनावों और पंचायत चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। टीएमसी समर्थकों का कहना है कि उनके उम्मीदवारों को हराने के लिए लेफ्ट-कांग्रेस और भारतीय मजदूर संघ के बीच मौन सहमति थी, लेकिन ऐसी साजिशें हर जगह काम नहीं करेंगे। सागरदिघी की हार पर भी सत्ताधारी दल की ओर से इसी तरह की प्रतिक्रियाएं जाहिर की गई थीं।
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