कलकत्ता हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ श्रद्धालुओं को दी दुर्गा पूजा पंडालों में प्रवेश की अनुमति
कोलकाता, 7 अक्टूबर। कोरोना वायरस संकट के बीच देशभर में आज (गुरुवार) से नवरात्रि का त्योहार शुरू हो गया है। इस बीच पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा में लोगों की भागीदारी पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ बंगाल में लोगों को दुर्गा पूजा में शामिल होने की इजाजत दे दी है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए पहले अदालत ने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने दुर्गा पूजा में शामिल होने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जैसे- कार्यक्रम में भाग लेने वाली सभी लोगों का फूली वैक्सीनेटेड (वैक्सीन की दोनों डोज) होना अनिवार्य होगा। वहीं, 45- 60 आयु वर्ग के लोग बड़े पूजा पंडालों में और 10-15 उम्र के बच्चों को छोटे पूजा पंडालों में जाने की अनुमति दी गई है। हालांकि हाई कोर्ट ने श्रद्धालुओं को ये अनुमति सिर्फ पुष्पांजलि और सिंदूर खेला में भाग लेने के लिए दी है। बाकी समय पहले की तरह लोगों के पुजा पंडालों में जाने पर रोक लगी रहेगी।
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पिछले सप्ताह शुक्रवार को न्यायालय ने आदेश दिया था कि जनता के लिए नो-एंट्री जोन बनाया जाए। ताकि भीड़ के कारण कोविड-19 संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने यह आदेश दिया था। याचिकाकर्ता ने कोरोना वायरस के प्रसार का हवाला देते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। पिछले साल भी दुर्गा पूजा के दौरान लोगों के प्रवेश पर रोक थी।












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