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Bengal Election 2021: कैसे एक 'गैंग' के खौफ ने सभी दलों के कार्यकर्ताओं को एकजुट कर दिया ?

मिदनापुर: शनिवार को पश्चिम बंगाल में 30 सीटों पर हुए पहले चरण के चुनाव के दौरान छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। ज्यादातर मामलों में सत्ताधारी टीएमसी के समर्थकों पर विरोधी दलों के समर्थकों और उसके उम्मीदवारों पर हमले के आरोप लगे हैं। कई सीटों पर वोटरों को धमकाने के भी मामले सामने आए हैं, लेकिन तृणमूल ने हमेशा की तरह सारे आरोपों से इनकार किया है। लेकिन, इसी दौरान ऐसी घटना भी सामने आई है, जहां जबर्दस्त सियासी दुश्मनी के माहौल में भी सभी दलों के समर्थक और कार्यकर्ता एकजुट दिखाई पड़े हैं। ऐसा मामला जबर्दस्त सियासी हिंसा की पहचान बन रहे मिदनापुर में सामने आया है, जहां झारखंड के 'जंगलों से आए एक गैंग' ने सबको अपनी-अपनी विचारधाराओं को छोड़कर एकसाथ आने को मजबूर कर दिया।

पहले चरण के चुनाव में कई जगहों पर छिटपुट हिंसा

पहले चरण के चुनाव में कई जगहों पर छिटपुट हिंसा

पहले चरण के चुनाव में बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर, बांकुरा और पुरुलिया में कई जगहों से चुनावी हिंसा की जानकारी सामने आई है। पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी में सीपीएम के पूर्व विधायक और लेफ्ट के उम्मीदवार सुशांता घोष पर हमला किया गया और उनके साथ चल रहे मीडियाकर्मियों की गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ये तब हुआ जब घोष कोशरा गांव के एक बूथ पर वोटिंग का जायजा लेने पहुंचे थे। घोष ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि उनके चुनाव एजेंट को उस बूथ से भगा दिया गया है। जब वे वहां पहुंचे तो कथित तौर पर टीएमसी समर्थकों ने उनपर हमला कर दिया। घोष को किसी तरह जान बचाकर वहां से निकल जाना पड़ा। हालांकि, टीएमसी ने इन घटनाओं में हाथ होने से इनकार किया है।

वोटरों को धमकाने के भी आरोप लगे

वोटरों को धमकाने के भी आरोप लगे

इसी तरह गढ़बेता के हेताशोल गांव में वोट डालकर लौट रहे तीन महिलाओं समेत 6 भाजपा समर्थकों ने टीएमसी समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया। पीड़ितों में से एक बरुण चौधरी ने कहा, 'टीएमसी के लोगों ने पहले हमें धमकाया था कि बीजेपी को वोट मत देना। जब हम लौट रहे थे, तब उन्होंने एकबार फिर से हमारी पसंद पूछी और फिर हम पर हमला करने लगे।' बाद में एसपी दिनेश कुमार ने निजी तौर पर इलाके का दौरा किया और फिर इस केस से संबंधित 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी तरह की तनाव की सूचना मोहनपुर से भी मिली जहां टीएमसी के एजेंटों ने दावा किया उन्हें बूथ में नहीं घुसने दिया जा रहा है। लेकिन, इन चुनावी हिंसा के बीच मिदनापुर से ही एक ऐसी खबर भी आई, जिसने सभी दलों के लोगों को समान दुश्मन के खिलाफ इकट्ठा होने पर मजबूर कर दिया।

12 हाथियों के झुंड ने विरोधियों को एकजुट कर दिया

12 हाथियों के झुंड ने विरोधियों को एकजुट कर दिया

मिदनापुर में ही 12 हाथियों के एक झुंड ने वोटरों और राजनीतिक दलों के समर्थकों में शनिवार को बहुत ही ज्यादा खौफ पैदा कर दी। जब जंगलों में हाथियों की खबर फैली तो वोटर बूथ पर जाने से इनकार करने लगे। इसके बाद सभी दलों के कार्यकर्ता मजबूरन एकजुट हुए और वन विभाग के अधिकारियों से मदद की गुहार लगाने पहुंच गए। उनकी मांग थी कि किसी तरह मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक लाने में मदद करें। हाथियों का ये दल भोजन की तलाश में झारखंड के जंगलों से स्थानीय गांवों में घुस आया था। लेकिन, इन्होंने ऐसा खौफ मचाया कि 27 गांव के वोटरों की बूथ तक जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी।

हम हाथियों से नहीं लड़ सकते- वोटर

हम हाथियों से नहीं लड़ सकते- वोटर

सभी दलों के कार्यकर्ताओं की गुहार सुनकर वन विभाग ने गुरगुरिपाल, चरदाह और बोइता के जंगलों में पेट्रोलिंग का इंतजाम किया। वन विभाग के अधिकारियों की तीन टीम गांव वालों को मतदान केंद्रों तक सुरक्षित ले जाने के लिए पहुंच गए। लोकराहाती गांव के निवासी बिकश मुर्मू ने कहा, 'शुक्रवार की रात को ये हाथी जंगलों में घुस आए और इस इलाके के कई गांवों पर धावा बोल दिया। हम राजनीतिक गुंडों से नहीं डरते हैं। यहां तक कि महामारी से भी नहीं डरते। लेकिन, हमारे पास जो भी है उसे हाथी तबाह कर देते हैं। हम उनसे नहीं लड़ सकते। इसलिए हमने फैसला किया कि हम वोट डालने के लिए नहीं निकलेंगे।'

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