विदिशा में स्मार्ट मीटर बना मुसीबत: 69 लाख का बिल देख बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी, कोई जांच नहीं, उल्टा जुर्माना
MP News: मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए आफत बन गए हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने पारदर्शी बिलिंग और बिजली चोरी रोकने के दावे के साथ पुराने मीटर हटाकर घर-घर स्मार्ट मीटर लगाए। लेकिन हकीकत में ये मीटर आम लोगों के लिए आर्थिक और मानसिक बोझ बन गए हैं।
शहर में स्मार्ट मीटर से जुड़े 107 मामले सामने आ चुके हैं, जहां उपभोक्ताओं को लाखों रुपये के बिल थमाए गए। सबसे चौंकाने वाला मामला होमगार्ड रोड निवासी 65 वर्षीय मुरारीलाल तिवारी का है, जिन्हें 69.75 लाख रुपये का बिजली बिल मिला, जिसे देखकर उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

मुरारीलाल तिवारी का मामला
होमगार्ड रोड पर अपनी पत्नी के साथ रहने वाले मुरारीलाल तिवारी के घर में बिजली की खपत बेहद कम है। उनके स्मार्ट मीटर में केवल 219 यूनिट की खपत दर्ज हुई, लेकिन पिछले महीने का बिल 69.75 लाख रुपये आया। बिल देखकर तिवारी सदमे में चले गए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों को उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा। तिवारी ने बिजली विभाग में शिकायत दर्ज की, लेकिन न तो कोई अफसर मौके पर पहुंचा, न ही कोई जांच शुरू हुई। उल्टा, अगले बिल में 1 लाख रुपये का जुर्माना जोड़ दिया गया।
तिवारी ने मीडिया से कहा, "हमारे घर में बस दो बल्ब, एक पंखा और एक टीवी है। इतनी कम खपत में इतना बिल कैसे आ सकता है? बिजली कंपनी के पास कोई जवाब नहीं है, और शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।" उनके पड़ोसी को भी 68 लाख रुपये का बिल मिला, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
झुग्गी बस्तियों में भी भारी बिल
विदिशा की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले मजदूर परिवारों की स्थिति और भी बदतर है। कई परिवारों को 7-7 लाख रुपये के बिल थमाए गए, जबकि उनके घरों में बमुश्किल एक बल्ब और पंखा चलता है। एक मजदूर, रामू बाई, ने बताया, "हमारी महीने की कमाई 8-10 हजार रुपये है। 7 लाख का बिल कहां से भरेंगे? स्मार्ट मीटर लगने के बाद से परेशानी बढ़ गई है।"
बिजली कंपनी का रवैया
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अफसरों का कहना है कि स्मार्ट मीटर की बिलिंग में तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसी समस्याएं आ रही हैं। लेकिन उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "यह कैसे हुआ, हमें भी नहीं पता। हम जानकारी ले रहे हैं।" अब तक न तो कोई औपचारिक जांच शुरू हुई, न ही उपभोक्ताओं को राहत दी गई।
उपभोक्ताओं की शिकायतों के बावजूद बिजली कंपनी ने कई मामलों में बिलों में जुर्माना जोड़ दिया, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। विदिशा के एक अन्य निवासी, श्यामलाल, ने बताया, "मैंने 3 लाख रुपये के बिल की शिकायत की थी, लेकिन अगले बिल में 50 हजार रुपये का जुर्माना जोड़ दिया गया। यह लूट है।"
सोशल मीडिया पर आक्रोश
स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है। @DainikBhaskar ने पोस्ट किया, "68 लाख का बिजली बिल देखकर तबीयत बिगड़ी: विदिशा में स्मार्ट मीटर से गड़बड़ी के 107 केस; अफसर बोले- यह कैसे हुआ, हमें पता नहीं।" @KunalChoudhary_ ने लिखा, "स्मार्ट मीटर आया घर-घर नया कहर बन के, बिल बढ़े बेहिसाब, दर्द छुपा हर जन मन के।" @newsnasha ने इसे "स्मार्ट मीटर स्कैम" करार देते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
कई यूजर्स ने स्मार्ट मीटर को "स्मार्ट लूट" का नाम दिया और मांग की कि सरकार तत्काल जांच करे। @snp_inc ने लिखा, "स्मार्ट मीटर, स्मार्ट सरकार, और स्मार्ट झूठ! क्या यह लापरवाही है या साजिश?"
स्मार्ट मीटर की समस्याएं
- मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्मार्ट मीटर को बिलिंग में पारदर्शिता और बिजली चोरी रोकने के लिए लागू किया था। लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई खामियां सामने आई हैं:
- तकनीकी गड़बड़ियां: स्मार्ट मीटर की रीडिंग में त्रुटियां, जिसके कारण बिल लाखों रुपये तक पहुंच रहे हैं।
- प्रीपेड सिस्टम की जटिलता: प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होने पर बिजली तुरंत कट जाती है, जिससे गरीब परिवारों को परेशानी हो रही है।
- शिकायत निवारण की कमी: उपभोक्ताओं की शिकायतों पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही।
अन्य राज्यों में भी समान समस्याएं
- विदिशा की यह समस्या अकेली नहीं है। अन्य राज्यों में भी स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं:
- उत्तराखंड: नैनीताल में एक उपभोक्ता को 47.9 लाख रुपये का बिल मिला, जिसे बाद में "तकनीकी गड़बड़ी" बताकर सुधारा गया।
- मुंबई: स्मार्ट मीटर की शिकायतों के बाद BEST ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए मीटर स्थापना रोक दी।
- वडोदरा: 25,000 से अधिक स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिलों में भारी वृद्धि की शिकायतें।
- बिहार: ऊर्जा मंत्री के आधिकारिक आवास पर भी स्मार्ट मीटर नहीं लगा, और 6.12 लाख रुपये का बकाया बिल सामने आया।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "स्मार्ट मीटर जनता के लिए स्मार्ट लूट बन गया है। 69 लाख का बिल भेजकर सरकार गरीबों का मजाक उड़ा रही है।" उन्होंने मांग की कि स्मार्ट मीटर की तत्काल जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। @jitupatwari ने पोस्ट किया, "विदिशा में स्मार्ट मीटर ने जनता को लूट लिया। क्या यही है बीजेपी का डिजिटल इंडिया?"
सरकार और बिजली कंपनी की स्थिति
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने माना कि स्मार्ट मीटर की बिलिंग में तकनीकी त्रुटियां हो सकती हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई योजना सामने नहीं आई। कंपनी ने उपभोक्ताओं से 1912 पर कॉल करने या स्थानीय बिजली कार्यालय में शिकायत दर्ज करने को कहा है। हालांकि, मुरारीलाल तिवारी जैसे कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही जांच समिति गठित कर सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए उपभोक्ता निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
शिकायत दर्ज करें: बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करें या स्थानीय कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करें।
कंज्यूमर फोरम: यदि बिल 20 लाख रुपये से अधिक है, तो राज्य कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज करें। 1 करोड़ रुपये से अधिक के बिल के लिए राष्ट्रीय कंज्यूमर फोरम से संपर्क करें।
कानूनी सहायता: वकील की सलाह से शिकायत पत्र तैयार करें, जिसमें बिल की जानकारी और पहले की गई शिकायतों का विवरण हो।
विदिशा में स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों ने न केवल उपभोक्ताओं का विश्वास तोड़ा है, बल्कि सरकार की डिजिटल इंडिया और स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम (SMNP) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश में अब तक लाखों स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन बिलिंग त्रुटियों और शिकायत निवारण की कमी ने इस परियोजना को विवादास्पद बना दिया है।
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