जलती चिताओं के सामने होली का जश्न, काशी के महाश्मशान पर यूं खेली गई चिता भस्म की Holi
वाराणसी, 15 मार्च: काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली खेली गई। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर आस्थावानों ने परंपरा के अनुसार सबसे पहले मसाननाथ की प्रतिमा पर अबीर गुलाल और चिता भस्म लगाया। इसके बाद घाट पर पहुंचकर ठंडी हो चुकी चिताओं से राख उठाकर एक दूसरे पर फेंककर चिता भस्म की होली खेली। मणिकर्णिका पर चिताओं की भस्म आरती करने की परंपरा का निर्वहन किया गया और मसाननाथ की आरती उतारी गई।

महाश्मशान पर लगा भक्तों का जमावड़ा
बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद लोगों का हुजूम महाश्मशान पर पहुंच गया। घाट पर बाबा के भक्तों का जमावड़ा लग गया। हजारों की संख्या में मणिकर्णिका घाट पर उमड़ी भीड़ और आस्था में रचे पगे धुनों की थाप से होलियाना मूड में महाश्मशान डूब गया।

रंगभरी एकादशी से होली का जश्न होता है शुरू
बता दें, रंगभरी एकादशी पर जिस तरह कृष्ण नगरी मथुरा, वृंदावन, बरसाना में होली की शुरुआत हो जाता है, उसी तरह बाबा की नगरी काशी में होली का जश्न शुरू हो जाता है। काशीवासी सबसे पहले अपने ईष्ट भोले बाबा के साथ महाशमशान पर चिता भष्म से होली खेलते हैं। इसके बाद काशी में होली की शुरुआत होती है।

डमरू, घंटे, घड़ियाल और मृदंग से गूंजा महाश्मशान
काशी में रंगभरी एकादशी पर श्मशान घाट पर चिता की भस्म से होली खेली गई। डमरू, घंटे, घड़ियाल और मृदंग, साउंड सिस्टम से निकलती धुनों के बीच चारों ओर जलती चिताओं की भस्म से खेली से पूरा माहौल होलीमय हो गया। बाबा के जयकारों से पूरा घाट क्षेत्र गूंज उठा। बाबा के भक्तों के बीच होली का उत्साह भी खूब नजर आया। भूत-प्रेत और पिशाच का स्वांग भरकर बाबा के भक्तों ने कपाल मुंडों की माला के साथ जमकर डांस किया।












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