वाराणसी सिर्फ सीट नहीं बल्कि केजरीवाल का फ्यूचर

arvind kejriwal
वाराणसी। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी को चुनौती देने के लिए केजरीवाल ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन अब लगने लगा है कि केजरीवाल का ये फैसला अब उनके लिए ही चुनौती बन गया है

केजरीवाल के लिए वाराणसी महज एक सीट नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का सवाल है। अरविंद केजरीवाल वाराणसी में वोटरों से यह कह रहे हैं कि मैं झोली फैलाकर भीख मांगने आया हूं, तो उनक मजबूरी है, क्योंकि वाराणसी में आम आदमी पार्टी के भविष्य पर दांव लगा हुआ है। यहां केजरीवाल की साख ही नहीं, बल्कि आप का भविष्य भी यहां के वोटों पर निर्भर रहेगा, जिसने वाराणसी फतह के लिए दिल्ली मॉडल पर रणनीति बनाई है।

अगर किसी करिश्में के तहत केजरीवाल इस सीट से जीत हासिल करते है तो यह इतिहास बन जाएगा और पार्टी नई ऊंचाइयों पर होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ और पार्टी दूसरे नबंर पर आती है तो वह केवल एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभरेगी और कांग्रेस की जगह ले सकती है, तो भी इसे आप की कामयाबी के तौर पर गिना जा सकता है, लेकिन यदि केजरीवाल तीसरे या उससे भी नीचे रहते हैं तो यह पार्टी का भविष्य चौपट कर सकता है। अभी जो लोग इस नई पार्टी को सीरियसली ले रहे हैं, उनका मोह भंग भी हो सकता है।

वाराणसी लोकसभा सीट में पांच विधानसभा आती है। आप की प्लैनिंग है कि केजरीवाल हर विधानसभा को करीब 4 दिन दें। वो डोर टू डोर कैंपेनिंग करेंगे और कई नुक्कड़ सभा भी करेंगे। केजरीवाल के लिए वाराणसी की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली की टीम देख रही है। नुक्कड़ नाटक की टीम भी दिल्ली से ही वहां गई है और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया मैनेजमेंट टीम भी। जहां भी पोलिंग होती जा रही है, वहां की टीम यहां आती जा रही है, लेकिन देखने वाली बात ये है कि क्या केजरीवाल ऐसा करने में कामयाब होते है।

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