कलयुग के श्रवण कुमार! पिता का दिया 20 साल पुराना स्कूटर, 73 साल की मां और 66 हजार Km. का सफर

जिस माँ ने कभी अपने गांव के पास के मंदिर नहीं देखे थे, उसे उनका बेटा पिता के स्कूटर पर लेकर निकल पड़ा है। कई राज्य, सैकड़ों ज़िले, 66 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर, धन्य है कलयुग का ये श्रवण कुमार।

Shravan Kumar of Kalyug Father old scooter 73 year old mother 66 thousand kilometer journey

त्रेतायुग के श्रवण कुमार की कहानी आपने पढ़ी और सुनी होगी। लेकिन क्या आपको पता है कि कलयुग में भी त्रेतायुग जैसे कई श्रवण कुमार है जिनकी कहानी और किस्से बेहद दिलचस्प हैं। कर्नाटका के मैसूर जिले के दक्षिणामूर्ति कृष्ण कुमार भी उनमें से एक है, जिन्हें लोग इन दिनों श्रवण कुमार कह कर पुकार रहे हैं। अपने पिता के दिए 20 साल पुराने स्कूटर से डी कृष्णकुमार अपनी 73 साल की मां को तीर्थ यात्रा करा रहें है। डी कृष्णकुमार ने अब तक 66 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय कर अपनी मां 'चूड़ा रत्ना' को देश के विभिन्न राज्यों के मंदिरों में दर्शन पूजन करा चुकें हैं।

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5 साल पहले शुरू की यात्रा, बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंची
आपको बता दें कि कलयुग के श्रवण कुमार यानी डी कृष्ण कुमार की ये अनोखी यात्रा 16 जनवरी 2018 को शुरू हुई थी। मैसूर जिले से डी कृष्ण कुमार अपने पिता के रूप में उनका दिया पहला तोफा बजाज स्कूटर और अपने 73 वर्षीय माँ को लेकर भारत यात्रा के लिए निकले थे। अपनी इस यात्रा के दौरान डी कृष्ण कुमार कई राज्यों और ज़िलों को पार करते हुए इन दिनों धार्मिक नगरी काशी में हैं और वो यहां संकट मोचन मन्दिर से लेकर बाबा विश्वनाथ के दरबार तक लगभग सभी मंदिरों के अपनी मां को दर्शन करा रहे है।

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अयोध्या, मथुरा जैसे तीर्थ भी जाएंगे
डी कृष्णकुमार ने बताया कि काशी के मंदिरों में अपनी मां को दर्शन पूजन कराने के बाद वो अयोध्या, मथुरा जैसे तीर्थ क्षेत्र भी जाएंगे और उसके बाद भी जब तक उनकी मां का मन नहीं भर जाता, उनकी ये यात्रा यूं ही जारी रहेगी। वाराणसी आने के बाद कृष्ण कुमार और उनकी मां अस्सी स्थित एक मठ में ठहरे हुए हैं।
मां के सेवा भाव के लिए शादी भी नहीं की
कृष्ण कुमार अपने माता पिता के इकलौते बेटे है। अपनी इस अनोखी यात्रा की शुरुआत से पहले वो बैंगलुरु में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर चुके हैं। करीब 13 साल काम करने के बाद उन्होंने जनवरी 2018 में अपनी जॉब से इस्तीफा दिया और फिर मां की सेवा में जुट गए। मां के सेवा भाव के लिए ही उन्होंने शादी भी नहीं की।

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    मल्टीनेशनल कंपनी में करते थे काम
    कृष्ण कुमार बताते है कि जॉब के दौरान मिली सैलरी को वो अपनी माता को समर्पित करते थे। वो उन्ही सेविंग से मिलने वाले इंटरेस्ट से इस यात्रा को कर रहें है। अपनी इस यात्रा के लिए वो किसी से कोई मदद भी नहीं लेते है।
    मां चूड़ा रत्ना बेहद खुश, ढेरों आशीर्वाद
    कृष्ण कुमार अब तक कश्मीर से कन्याकुमारी और नेपाल से म्यामार तक विभिन्न प्रदेशों में यात्रा कर चुके है। उनकी मां चूड़ा रत्ना भी उनके इस सेवा भाव और समर्पण से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि उनके श्रवण कुमार जैसा बेटा हर मां को मिले, जिससे कोई भी मां बाप घर के कोने या वृद्धा आश्रम में न रह सकें।

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