कॉन्वेंट स्कूलों को फेल कर रहा वाराणसी का यह Sarkari School, बच्चे बोलते हैं फर्राटेदार अंग्रेजी

वाराणसी में एक ऐसा Sarkari School है जो कॉन्वेंट स्कूलों को फेल कर रहा है, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे फर्राटदार अंग्रेजी बोलते हैं और सीटें हमेशा रहती हैं फुल नहीं हो पाता है नए बच्‍चों का एडमिशन

वाराणसी में एक ऐसा Sarkari School है जो कॉन्वेंट स्कूलों को फेल कर रहा है। वर्तमान समय में कई ऐसे अभिभावक हैं जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए सरकारी स्कूल की अपेक्षा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाना बेहतर समझते हैं। सरकारी स्कूलों में सरकार द्वारा तमाम सुविधाएं दिए जाने के बाद भी अधिकतर विद्यालयों की सूरत आज भी खस्ताहाल है और पढ़ने की जगह बहुत से अभिभावको द्वारा सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में एडमिशन करवाया जाता है। कुछ ऐसे में अभिभावक हैं जिनके पास कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं और लाचारी में वे अपने बच्चे का सरकारी स्कूल में एडमिशन करवाते हैं। इन सबके बीच वाराणसी जिले के पिंडरा तहसील क्षेत्र में स्थित प्राथमिक विद्यालय सैरा गोपालपुर की तस्वीर अध्यापकों ने अपने कठिन परिश्रम के बल पर बदल दी है। यहां पर पढ़ने वाले बच्चे और उनके अभिभावक भी खुद को गौरवांन्वित महसूस करते हैं। कॉन्वेंट स्कूलों की टक्कर देने वाले इस स्कूल में पढ़ाई के साथ ही योगा और संस्कार की भी शिक्षा दी जाती है। यही कारण है कि यहां पर सीटें हमेशा फुल रहती हैं। अच्‍छी शिक्षा के लिए विद्यालय के अध्यापक और बच्चे कई बार पुरस्कृत भी हो चुके हैं।

साल 2016 से बदलने लगी विद्यालय की सूरत

साल 2016 से बदलने लगी विद्यालय की सूरत

वाराणसी जिले के पिंडरा तहसील अंतर्गत सैरागोपालपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2016 में मनोज कुमार सिंह नामक प्रधानाध्यापक की तैनाती हुई। मनोज कुमार सिंह की तैनाती के बाद विद्यालय की सूरत बदलने लगी। प्रधानाध्यापक मनोज कुमार बताते हैं कि शुरुआती समय में उनको लगा कि यहां के बच्चे काफी अच्छे हैं और मेहनत करके यहां का परिवेश बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस काम में विद्यालय के अध्यापक और बच्चों तथा उनके अभिभावकों का पूरा सहयोग मिला।

विद्यालय परिसर हरा भरा, बच्चे करते हैं योगा

विद्यालय परिसर हरा भरा, बच्चे करते हैं योगा

मनोज कुमार बताते हैं कि सबसे पहले उन्होंने विद्यालय में फूलों सहित अन्य पौधे लगवाए तथा विद्यालय की पेंटिंग करवाए। जिस विद्यालय में पहले हरियाली नहीं थी और पढ़ने के लिए काफी कम बच्चे आते थे। उसी विद्यालय में जब बेहतर शिक्षा दी जाने लगी तो छात्रों की संख्या भी बढ़ने लगे। स्‍कूल में बच्‍चों को योगा और संस्‍कारों की शिक्षा दी जाने लगी। साल भर में ही स्थिति ऐसी हो गई कि विद्यालय में सीट कम हो जाने के चलते नो एडमिशन का बोर्ड लगाना पड़ा और नए बच्‍चों के प्रवेश पर रोक लगा दिया गया। वर्ष 2020 में नो एडमिशन का बोर्ड लगाने के बाद वह सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था।

कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों का सरकारी में हुआ एडमिशन

कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों का सरकारी में हुआ एडमिशन

विद्यालय के अध्यापक बताते हैं कि पढ़ाई करने के बाद गांव में जाने पर बच्चों से जब कॉन्‍वेंट स्‍कूल बच्चों के अध्यापक या अभिभावक पूछताछ करते तो सवालों का जवाब देने में बच्चों को तनिक भी समय नहीं लगता। इसके अलावा बच्चों को संस्‍कारों की शिक्षा दिये जाने के चलते उनके संस्कारों से भी समाज के लोग रूबरू होने लगे। ऐसे में गांव के कई ऐसे अभिभावक थे जो अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में उनका नामांकन करवाए।

स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और भी बहुत कुछ

स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और भी बहुत कुछ

विद्यालय में बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए सभी प्रयास किए गए हैं। कंप्यूटर ज्ञान से भी यहां के बच्चे अछूते नहीं हैं और कॉन्वेंट स्कूलों की तरह विद्यालय में स्मार्ट क्लासरूम हैं। इन सभी सुविधाओं के अलावा सौर ऊर्जा से चलने वाले पंखे और पेयजल के लिए आरओ मशीन सहित कई अन्य सुविधाएं भी हैं। विद्यालय में कई ऐसी सुविधाएं हैं जो आसपास के अन्य कॉन्वेंट स्कूलों में भी नहीं हैं।

3000 पुस्तकों से भरा है पुस्तकालय

3000 पुस्तकों से भरा है पुस्तकालय

विद्यालय में एक पुस्तकालय बनाया गया है जिसमें 3000 से अधिक पुस्तकें रखी गई हैं। पुस्तकालय में नियमित कक्षावार बच्चे पढ़ने आते हैं। इसके अलावा स्कूल में पढ़ने के साथ ही बच्चे स्वीकृत कराकर पुस्तक अपने साथ घर भी पढ़ने के लिए ले जाते हैं। प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने बताया कि पुस्तकालय में गांव के लोग भी आते हैं और स्वीकृत कराकर पुस्तक घर पढ़ने के लिए ले जाते हैं। प्रधानाध्यापक की प्रेरणा से बहुत सारे बच्चे स्कूल के बाद " बच्चों का बच्चों के लिए बच्चों द्वारा" गांव में छात्र चौपाल लगाते है जिसमें विद्यालय के पुस्तकालय की पुस्तकों का उपयोग करते हैं।

बच्चों का रहता है अलग-अलग परिधान

बच्चों का रहता है अलग-अलग परिधान

प्राथमिक विद्यालय में बुधवार व शनिवार को बच्चे लोअर टी-शर्ट में पढ़ने के लिए आते हैं। बुधवार को मध्यान्ह के बाद गतिविधि आधारित शिक्षण तथा शनिवार को नो बैग डे पर समस्त प्रभार व कार्यदायित्व बाल संसद के मंत्रिमंडल का होता है। जो संसद की बैठक के बाद बाल सभा व खेलकूद का आयोजन कराता है। इसमें कक्षा 1 से 3 के बच्चों के लिए पीला टी शर्ट व नीला लोअर तथा कक्षा 4से 5 के बच्चों के लिए लाल टी शर्ट व नीला लोअर निर्धारित किया गया है। जिसे अभिभावकों द्वारा सहर्ष उपलब्ध कराया जाता है।

क्षेत्रीय लोगों का मिलता है अत्यधिक सहयोग

क्षेत्रीय लोगों का मिलता है अत्यधिक सहयोग

प्रधानाध्यापक मनोज कुमार बताते हैं कि सरकारी मद से विद्यालय में जो कुछ हो पाता है उनके द्वारा किया जाता है। लेकिन विद्यालय को बेहतर बनाने के लिए कई संस्थाओं और व्यवसायियों द्वारा समय-समय पर मदद किया जाता है। कुछ लोगों द्वारा सोलर पैनल लगवाया गया है तो किसी ने बेंच दिया है। किसी के द्वारा बच्चों के लिए पंखे लगाए गए हैं तो खाने के लिए थाली भी किसी समाजसेवी द्वारा ही दान में दिया गया है।

पिछले माह एएआई ने बनवाया दो भोजनालय कक्ष

पिछले माह एएआई ने बनवाया दो भोजनालय कक्ष

विद्यालय में बच्चों को भोजन करने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा 18 लाख रुपए खर्च करके दो भोजनालय कक्ष बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर के दिन अजगरा विधायक त्रिभुवन राम द्वारा इसका उद्घाटन भी किया गया था। इसके अलावा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा विद्यालय में 4 केवीए का सोलर पैनल और इनवर्टर बैटरी भी लगवाई गई है तथा 8 पंखे और 30 एलईडी लाइट भी बच्चों के क्लास रूम में लगाई गई हैं। उद्घाटन समारोह में पहुंचने पर बच्चों से मिलने के बाद एयरपोर्ट निदेशक आर्यमा सान्याल ने बताया कि सरकारी विद्यालय वाकई कॉन्वेंट स्कूलों को फेल कर रहा है, विद्यालय के बच्चे बहुत क्रिएटिव हैं।

अन्य स्कूलों की भी बदल सकती है सूरत

अन्य स्कूलों की भी बदल सकती है सूरत

सैरा गोपालपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक और अध्यापकों का कहना है कि मेहनत करके और बच्चों तथा क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से ही यह सब हो पाया है। अध्यापकों ने यह भी बताया कि कई गांव में अभिभावकों द्वारा शिक्षकों का सहयोग नहीं किया जाता है, यदि अभिभावकों द्वारा शिक्षकों का सहयोग किया जाए और शिक्षक भी अपनी ड्यूटी को पूरा करें तो किसी भी सरकारी विद्यालय की तस्वीर बदली जा सकती है।

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