कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद वाराणसी में 14 दिनों तक धरने पर बैठे थे राजनाथ सिंह, अटल जी भी आए थे बनारस
साल 2005 में विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद पूर्वांचल का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया था। मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वाराणसी मुख्यालय पर 14 दिनों तक धरने पर बैठे रहे।

करीब 17 साल 5 महीने पहले साल 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद पूरी यूपी की सियासत गर्म हो गई थी। इस हत्याकांड में विधायक कृष्णानंद राय समेत कुल 7 लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। हत्याकांड के बाद मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वाराणसी में 14 दिनों तक धरने पर बैठे रहे।
इसके अलावा वाराणसी में अटल बिहारी वाजपेई भी विरोध जताने के लिए पहुंचे थे। उस समय अटल बिहारी वाजपेई को सुनने के लिए वाराणसी में काफी संख्या में भीड़ एकत्र हुई थी। वाराणसी के अलावा गाजीपुर, मऊ, बलिया आदि जनपदों में भी विधायक के समर्थकों का गुस्सा देखने को मिला था।
वाराणसी में पहुंचे अटल बिहारी वाजपेई ने प्रदेश में सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि अब उत्तर प्रदेश में निर्णायक जंग होगी। यूपी में प्रतिदिन हत्याएं हो रही है और जान की कोई कीमत नहीं रह गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि अब परिवर्तन का समय आ गया है और यूपी में हो रही हत्याओं को रोकना पड़ेगा।
क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करके लौटते समय हुई थी हत्या: 29 नवंबर 2005 को विधायक कृष्णानंद राय गाजीपुर जनपद के मोहम्मदाबाद विधानसभा अंतर्गत भांवरकोल में एक क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करने के लिए पहुंचे थे।
क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने के बाद भाजपा विधायक कृष्णानंद राय अपने सहयोगियों के साथ गांव से बाहर निकले थे। इसी दौरान सिल्वर रंग की टाटा सुमो से आए 7-8 बदमाशों द्वारा उनके ऊपर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। फायरिंग में विधायक कृष्णानंद राय समेत कुल 7 लोगों की मौत हुई थी।
रिपोर्ट की मानें तो विधायक कृष्णानंद राय की हत्या हो जाने के बाद जब विधायक कृष्णानंद राय के साथ ही इस हत्याकांड में मरने वाले लोगों का पोस्टमार्टम किया गया तो 67 गोलियां निकली थी। कहा जाता है कि कृष्णानंद राय अपनी बुलेटप्रूफ वाहन चलते थे लेकिन उस दिन सटीक सूचना के चलते उनकी हत्या हुई थी।
हत्या कि सूचना जैसे ही वाराणसी में रहने वाले विधायक कृष्णानंद राय के समर्थकों को मिली पूरे शहर में माहौल गर्म हो गया था। वाराणसी में उनके समर्थकों द्वारा भेलूपुर, सिगरा, लंका, कमच्छा, इंग्लिशिया लाइन, लहुराबीर सहित अन्य इलाकों में जमकर बवाल किया गया था।
विधायक के समर्थकों को काबू में करने में पुलिस को काफी परेशान होना पड़ा हालांकि बाद में किसी तरह उनके समर्थकों को समझा-बुझाकर पुलिस द्वारा शांत कराया गया। वहीं पोस्टमार्टम के बाद जब अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए निकली तो 5 किलोमीटर लंबा जनसैलाब उमड़ा था।
अंतिम संस्कार के दिन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय के जानने वाले और उनके समर्थकों की इतनी भीड़ वाराणसी में थी कि वाराणसी गाजीपुर मार्ग पूरे दिन जाम रहा। इस हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया था।












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