अद्भुत! मुस्लिम समाज के लोगों ने महंत के चरणों में टेका मत्था, कहा: 'गुरु किसी धर्म और जाति का नहीं'
सनातन धर्म के शास्त्रों के अनुसार गुरु को देवताओं से भी ऊंचा स्थान प्राप्त है। गुरु को लेकर एक श्लोक काफी प्रचलित है, 'हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर', अर्थात जब भगवान रूठते हैं तो गुरु की शरण मिलती है और अगर गुरु रूठ जाए तो कहीं भी शरण नहीं मिलती। इसलिए जीवन में गुरु का होना बहुत महत्वपूर्ण होता है।
इसलिए पिछले कई हजार सालों से अपने गुरु के वंदन और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारत में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। 2023 में यह पर्व 3 जुलाई को पूरे भारत में मनाया गया। इसी क्रम में आदियोगी शिव की नगरी वाराणसी में भी सुबह से ही तमाम मठ-आश्रम और मंदिरों में लोगों ने अपने गुरु की पूजा कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया। लेकिन पातालपुरी मठ से कुछ ऐसी अद्भुत तस्वीरें देखने को मिली, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।

मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा गुरु पूजन
आपको बता दें वाराणसी के पातालपुरी मठ में कई मुस्लिम शिष्य गुरु की पूजा करते दिखे। यहां मुस्लिम समाज से आए लोगों ने पूरे विधि विधान के साथ पहले मठ के महंत स्वामी बालक दास के चरणों में मत्था टेका। इसके बाद माला पहनाकर और उनकी आरती उतार कर आशीर्वाद लिया। इनका कहना है कि 'गुरु किसी धर्म और जाति का नहीं होता। वह जीवन को बदलने और बेहतर दिशा देने वाला होता है।'
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साम्प्रदायिक एकता का अद्भुत नजारा
वहीं मंत्रोच्चार के बीच मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा इस अद्भुत गुरु भक्ति की चर्चा पूरे शहर में है। धर्म-जाति के नाम पर भेद मिटाकर भारत की सांस्कृतिक पहचान कायम रखने वाली काशी का यह अद्भुत नजारा भले ही पडोसी देशों की नजरों में खटके, लेकिन ऐसी साम्प्रदायिक एकता की मिसाल हमरे देश में कई अवसरों पर देखने को मिल ही जाती है।

रामनामी दुपट्टा किया भेंट
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी, मुस्लिम धर्मगुरु अफसर बाबा के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पातालपुरी मठ पहुंचे। यहां उन्होंने अपने गुरु महंत बालक दास की आरती और पूजा अर्चना करने के साथ-साथ रामनामी दुपट्टा भी भेंट किया। वहीं सोशल मीडिया पर लोगों ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, 'धर्म के नाम पर हिंसा करने वालों को यह तस्वीरें देखनी चाहिए और इससे बेहतर सबक लेना चाहिए।'

'गुरु वही है जो सब भेद खत्म कर दे'
इस मौके पर मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी कहती हैं, 'काशी ज्ञान की नगरी है। यहां के गुरुओं ने विश्व को शांति और सद्भावना का मार्ग दिखाया है। गुरु किसी धर्म और जाति का नहीं होता वह जीवन को बदलने और बेहतर दिशा देने वाला होता है। गुरु वही है जो सब भेद खत्म कर दे।'

वहीं मुस्लिम धर्म गुरु अफसर बाबा ने कहा कि 'काशी गुरुओं की नगरी है। गुरु पूर्णिमा पर मुस्लिम समाज गुरुओं के सम्मान में पीछे क्यों रहे। विद्या और ज्ञान देने वाला गुरु सदैव महान होता है और उसकी इज्जत सभी को करनी चाहिए।'












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