'यह धार्मिक अपराध है', तिरुपति प्रसादम में चर्बी के मुद्दे पर काशी के संत भी नाराज, जानें क्या कहा?
Tirupati Prasadam: आंध्र प्रदेश में तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसादम में घी की जगह जानवरों की चर्बी मिलाए जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। इस मामले के सामने आने के बाद काशी का संत समाज भी काफी नाराज है।
काशी के संतों का कहना है कि यह धार्मिक अपराध है। इस पूरे मामले में निष्पक्ष रूप से जांच की जानी चाहिए। जांच करने के बाद जो भी इस मामले में दोषी पाया जाता है। उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

मामले में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती द्वारा भी बयान जारी किया गया। उन्होंने कहा कि तिरुपति के तिरुमाला देवस्थानम को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जो रहस्योद्घाटन यह बहुत ही गंभीर किस्म का धार्मिक अपराध है।
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उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी युक्त घी का प्रयोग जगनमोहन रेड्डी की सरकार में किया जा रहा था। वस्तुत अखिल भारतीय संत समिति का मानना है की मठ और मंदिर चलाना सरकारों का काम नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल की सरकार, बंगाल की सरकार और जगनमोहन रेड्डी की सरकार जब तक थी तब तक गैर हिंदुओं को मंदिर के प्रबंधन में बड़ी मात्रा में नौकरी के अवसर ढूंढने का काम करती थी। यह बहुत ही धार्मिक दृष्टि से अक्षम्य अपराध है।
उन्होंने अभी सवाल किया कि क्या इस्लाम या क्रिश्चियन अपने संप्रदायगत कार्यों में हिंदुओं को हस्तक्षेप करने की अनुमति देगा?, कतई नहीं देगा। तो हिंदू समाज अपने मठ मंदिर और अपने स्वच्छता पवित्रता के विषय पर किसी और को अनुमति क्यों देगा।
इसके अलावा काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी द्वारा भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी गई है। उन्होंने इस मामले पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तिरुपति मंदिर में लड्डुओं का प्रसाद बनाने वाली सामग्री में जानवरों की चर्बी मिलने की सूचना से हिंदू समाज के श्रद्धालुओं के भावनाओं को ठेस पहुंची है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह तथ्य पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुआ था, जिसका खुलासा सरकार के प्रयोगशाला रिपोर्ट में हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना की हम कड़ी निंदा करते हैं। केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार से उन्होंने मांग किया कि इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले में शीघ्र ही बैठक कर काशी विद्वत परिषद उचित निर्णय लेगी।












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