Gyanvapi Case: आपसी सुलह समझौता मामले पर हिंदू पक्ष के वकील बोले- 'भ्रमित कर रहे हैं कुछ लोग'
Gyanvapi Case: वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मौजूदा समय में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे किया जा रहा है। मौजूदा समय में भी सर्वे जारी है। इसी बीच विश्व वैदिक सनातन संघ द्वारा ज्ञानवापी मसले पर मुस्लिम पक्ष से आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की अपील किए जाने के मामले में हिंदू पक्ष के वकीलों द्वारा नाराजगी जाहिर की गई है।
आपसी सुलह समझौता वाले मामले पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन द्वारा गुरुवार को कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। उन्होंने कहा कि मैं किसी संगठन का नाम नहीं लेना चाहता हूं। कोई भी संगठन ऐसा नहीं है जो हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करता हो। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर की संपत्ति के बारे में समझौता करने का अधिकार किसी को नहीं है।

इसके अलावा हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन द्वारा मीडिया को बयान देते हुए कहा गया कि जो लोग इस तरह की मुहिम चला रहे हैं वे लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म के लिए ऐसे लोग भ्रम पैदा कर रहे हैं और फूट डालना चाहते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि जितने भी कैसे हैं इसकी मुहिम मैंने शुरू की है। पूरे केस में कोर्ट फैसला लेगा और इसमें समझौता या गिव एंड टेक नहीं हो सकता है। भगवान की संपत्ति कोई भी व्यक्ति किसी को नहीं दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी की पूरी ज्ञानवापी की संपत्ति भगवान शिव की है। ऐसे में किसी भी संगठन को या किसी हिंदू को 1 इंच जमीन भी किसी को देने का अधिकार नहीं है।
दरअसल, 14 अगस्त को विश्व वैदिक सनातन संघ द्वारा ज्ञानवापी परिसर के न्यायिक विवाद का न्यायालय के बाहर आपसी सहमति से शांतिपूर्ण निस्तारण व आपसी बातचीत हेतु आमंत्रण के लिए अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को एक पत्र लिखा गया था, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। पत्र में लिखा गया है कि ज्ञानवापी परिसर को लेकर हिंदू पक्ष व मुस्लिम पक्ष अपने-अपने पक्ष को सही सिद्ध करने के लिए न्यायालय में संवैधानिक लड़ाई लड़ रहा है।
पत्र में यह भी लिखा गया है कि लड़ाई का लाभ कुछ और सामाजिक तत्व अपने निजी फायदे के लिए उठाना चाहते हैं। जो कि देश और समाज दोनों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। ऐसे में देश और समाज की रक्षा और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इस विवाद का निस्तारण शांतिपूर्ण तरीके से आपसी बातचीत के माध्यम से निकाल कर एक मिसाल कायम करें। यही पत्र सामने आने और जानकारी के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन द्वारा गुरुवार को बयान जारी करते हुए ऐसे किसी मामले का विरोध किया गया।












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