Varanasi: विदेश मंत्री जयशंकर ने दलित बूथ अध्यक्ष के घर फर्श पर बैठकर किया नाश्ता, बोले- 'बहुत स्वादिष्ट था'
G-20 Varanasi: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर जी-20 सम्मेलन के तहत होने वाली बैठक की अध्यक्षता करने के लिए वाराणसी के दौरे पर हैं। रविवार सुबह दलित बूथ अध्यक्ष के घर नाश्ता किया।
G-20 Varanasi: जी-20 सम्मेलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सम्मेलन के तहत होने वाली बैठक की अध्यक्षता करने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर वाराणसी दौरे पर हैं।
विदेश मंत्री रविवार को दोपहर में जी-20 सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए विदेशी मेहमानों के साथ वार्ता करेंगे। इससे पहले रविवार सुबह में उन्होंने अनुसूचित जाति की अध्यक्ष सुजाता के घर पहुंचकर उन्होंने नाश्ता किया।

नाश्ता के दौरान उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता भी उनके साथ मौजूद रहे। वहां से निकलते समय उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि नाश्ता काफी स्वादिष्ट रहा। उन्होंने यह भी कहा कि काशी बाबा की नगरी है और यहां आना सौभाग्य की बात है।
इसके अलावा दलित महिला सुजाता ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि रात से ही उनके घर पर तैयारियां चल रही थी। उनके लिए यह बहुत ही खुशी का पल था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कभी इस बात का भरोसा नहीं था कि उनके घर इतने बड़े शक्तिशाली हस्ती का आगमन होगा।
आपको बता दें कि विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर रविवार दोपहर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अध्ययनपीठ सभागार में आयोजित भारतीय विदेश नीति के उद्देश्यों और विशेषताओं पर आयोजित संगोष्ठी में हिस्सा लेंगे। इस दौरान भी वह संगोष्ठी में मौजूद लोगों को संबोधित करेंगे।
मालूम हो कि शनिवार शाम विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर चार दिवसीय दौरे पर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी क्योको जयशंकर भी वाराणसी आई हैं।
वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं ने उनकी अगवानी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि काशी की धरती में कदम रखते ही मन गदगद हो जाता है। काशी का आतिथ्य दुनिया में सर्वमान्य है।
यह भी बता दें कि विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का यह वाराणसी का दूसरा दौरा है। इसके पहले वाराणसी में आयोजित काशी-तमिल संगम में आने वाले अतिथियों को संबोधित करने के लिए वे काशी आए थे।












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