Farmers Subsidy: सरकार की योजना से वाराणसी में मिलेगी सस्ती खाद, 68 करोड़ की मदद से अन्नदाताओं को मिलेगी राहत
Farmers Subsidy: वाराणसी के अन्नदाताओं के लिए राहत भरी खबर है। इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अब तक किसानों को यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों पर 68 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी मिली है। इस पहल से खेती की लागत घटने के साथ आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।
केंद्र और प्रदेश सरकार ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिले। प्रशासन की ओर से पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है, जिससे बिचौलियों के बिना सीधे किसानों तक सब्सिडी पहुंच रही है।

जिला प्रशासन के अनुसार, अब तक 15,750 मीट्रिक टन यूरिया और 4,920 मीट्रिक टन डीएपी किसानों को वितरित किया जा चुका है। समय पर खाद मिलने से फसलों की पैदावार में भी सकारात्मक असर देखा जा रहा है।
सब्सिडी से आधे दाम पर मिल रहा उर्वरक
यूरिया की वास्तविक कीमत अलग-अलग कंपनियों के हिसाब से 1,497 से 2,175 रुपये प्रति बोरी है। मगर सब्सिडी के कारण किसान इसे मात्र 266.50 रुपये में खरीद रहे हैं। इसी तरह डीएपी की कीमत 2,740 रुपये से घटकर 1,350 रुपये प्रति बैग हो गई है।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का कहना है कि सरकार यूरिया पर 1,231 से 1,908 रुपये और डीएपी पर लगभग 1,390 रुपये प्रति बैग तक सब्सिडी दे रही है। इससे खेती की लागत में बड़ी कमी आई है और किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
पारदर्शी आपूर्ति के लिए नई व्यवस्था
खाद वितरण को लेकर जिला प्रशासन ने मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तैयार की है। अब वाराणसी के हर हिस्से में समय पर उर्वरक पहुंच रहा है। साथ ही, वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल पॉस मशीन का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है।
खरीद के दौरान किसानों को अपना खतौनी और आधार कार्ड साथ लाना होता है। पॉस मशीन पर अंगूठा लगाकर ही उर्वरक खरीदा जाता है। इससे सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचती है और गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती।
किसानों के लिए प्रशासन की अपील
अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया है कि वे वैज्ञानिक तरीके से ही उर्वरक का प्रयोग करें। फसल के प्रकार और खेत की जरूरत को ध्यान में रखते हुए खाद का इस्तेमाल करना बेहतर पैदावार और मिट्टी की सेहत दोनों के लिए लाभकारी होगा।
इसके साथ ही खाद खरीदते समय बिल अवश्य लें। इससे न केवल सब्सिडी का लाभ सुनिश्चित होगा, बल्कि भविष्य में किसी शिकायत की स्थिति में सबूत भी उपलब्ध रहेगा। प्रशासन ने पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है।
अब तक यूरिया पर 54.91 करोड़ और डीएपी पर 13.67 करोड़ रुपये की सब्सिडी बांटी जा चुकी है। किसानों का कहना है कि समय पर और सस्ती खाद मिलने से खेती की लागत में कमी आई है और उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।












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