वाराणसी: 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा, जानें क्या है मामला
वाराणसी में हाईकोर्ट के आदेश पर आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर श्यामदास वर्मा द्वारा दर्ज कराया गया है।
वाराणसी, 19अगस्त: बीएचयू के एक छात्र की मौत के मामले में 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश पर वाराणसी के लंका थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर श्याम दास वर्मा ने इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी, दरोगा प्रद्युम्न मणि त्रिपाठी और कुंवर सिंह, हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकांत मिश्रा और ओम कुमार सिंह तथा शैलेंद्र कुमार सिंह, विजय कुमार यादव और होमगार्ड संतोष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। मामला बीएचयू के छात्र की मौत से जुड़ा हुआ है। ढाई साल पहले बीएचयू के छात्र को पुलिस थाने में पकड़ कर लाई थी जो थाने से फरार हो गया था। बाद में उसका शव रामनगर थाना क्षेत्र के कुतलूपुर गांव में स्थित एक पोखरी में मिला था।

लंका थाने लेकर आई थी पीआरवी
सीबीसीआईडी के इंस्पेक्टर के अनुसार मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के बड़गड़ी खुर्द, बज्रपुर गांव का रहने वाला शिव कुमार त्रिवेदी बीएचयू के विज्ञान संस्थान से बीएससी की पढ़ाई कर रहा था। वह छित्तूपुर क्षेत्र में स्थित एक लॉज में किराए का कमरा लेकर रहता था। 13 फरवरी 2020 की रात्रि में वह बीएचयू कैंपस में स्थित खेल के मैदान के पास गुमसुम बैठा था। उसे देखकर बीएचयू के ही एक छात्र अर्जुन सिंह द्वारा अनहोनी की आशंका को भांपते हुए 112 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पीआरवी पहुंची और पुलिसकर्मी उसे लंका थाने ले गए। दूसरे दिन लंका थाने से वह छात्र गायब हो गया।

काफी समय तक उसकी नहीं मिली जानकारी
शिव से बात न हो पाने के बाद उसके पिता प्रदीप कुमार त्रिवेदी उसकी खोजबीन के लिए पन्ना जिला से वाराणसी आए। शिव जहां रहता था वहां पर पूछताछ करने पर पता चला कि कई दिन से वह नहीं आ रहा। उसके बाद उसके पिता काफी परेशान हुए और लंका थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाए। इस दौरान पुलिस पूरे मामले को छुपाती रही। छात्र के पिता पंपलेट पर उसकी फोटो छपवा कर बीएचयू और आसपास के इलाकों में बंटवाए। काफी प्रयास करने के बाद भी शिव के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

डीएनए जांच के बाद मामला आया सामने
इस बारे में जब छात्र अर्जुन सिंह को पता चला तो वह शिव के पिता से मिलकर पूरी बात बताई। उसने कहा कि 112 नंबर डायल कर पुलिस को अर्जुन नहीं बुलाया था और पुलिसकर्मी उसे थाने ले कर गए थे। उसके बाद पुलिसकर्मी फंसते नजर आए। इस मामले की जानकारी बीएचयू के पूर्व छात्र एडवोकेट सौरभ तिवारी को हुई तो उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीसीआईडी ने शुरू की। बाद में पता चला कि 15 फरवरी 2020 को रामनगर थाना क्षेत्र के कुतलूपुर में जो शव मिला था वह शिव का ही था। पुष्टि के लिए थाने में रखे हुए दांत और बाल के डीएनए से जब प्रदीप कुमार त्रिवेदी के डीएनए का मिलान कराया गया तो स्पष्ट हुआ कि पोखरी में मिला शव शिव का ही था।












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