Banaras Music Pathway: वाराणसी में संगीत प्रेमियों को तोहफा, बनारस घराने की विरासत को जीवंत करेगा 'संगीत पथ'
Banaras Music Pathway: बनारस, जिसे आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक माना जाता है, अब एक और अनोखी पहचान के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर यहां "संगीत पाथवे" नामक एक अनूठी परियोजना लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस संगीतमय पथ के ज़रिए बनारस की समृद्ध संगीत परंपरा को लोगों के सामने जीवंत रूप में लाया जाएगा।
यह पाथवे न केवल बनारसी संगीत के इतिहास को सहेजेगा, बल्कि पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को एक अलग तरह का अनुभव भी देगा। फुलवरिया तिराहे से शिवपुर स्थित जेल की दीवार के समांतर डेढ़ किलोमीटर तक फैला यह मार्ग विशेष डिज़ाइन के साथ तैयार किया जा रहा है।

यहां पर हर कदम पर संगीत महसूस किया जा सकेगा। जैसे ही आप पाथवे पर चलेंगे, आपके कानों में शहनाई, तबला और बनारस घराने की धुनें गूंजने लगेंगी। यह मार्ग ऐसा अनुभव देगा, जो आपको कहीं और नहीं मिलेगा।
बनारसी संगीत की आत्मा को मिलेगा जीवंत मंच
इस संगीतमय पाथवे की खासियत यह है कि इसमें जगह-जगह वाद्य यंत्र लगाए गए हैं, जिन्हें छूते ही मधुर ध्वनियाँ निकलेंगी। इसका उद्देश्य बनारसी संगीत की आत्मा से लोगों को जोड़ना और युवाओं को संगीत के प्रति प्रेरित करना है।
यह प्रयास न केवल पारंपरिक संगीत की महत्ता को बनाए रखेगा, बल्कि बनारसी घराने की सांगीतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित भी करेगा।
मंत्री ने स्वयं परखे वाद्य यंत्र, दिए निर्देश
उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने इस पाथवे का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर लगे वाद्य यंत्रों को खुद बजाकर देखा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतिम चरण के बचे कार्य को शीघ्रता और सावधानी के साथ पूरा किया जाए ताकि यह प्रोजेक्ट तय समय पर जनता के लिए खोल दिया जा सके।
सजावट और लाइटिंग का काम जारी
विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों ने बताया कि पाथवे का 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब सजावट, रात्रिकालीन लाइटिंग और अंतिम टचअप पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।
इस संगीतमय पथ की डिज़ाइन इस तरह की गई है कि यह सांस्कृतिक अनुभव के साथ-साथ टहलने और सैर-सपाटे के लिए भी आदर्श स्थान बनेगा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पाथवे बनारस की पहचान को नई दिशा देगा। इससे न केवल सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बनारस को एक नया प्रतीक भी मिलेगा जो संगीत और संस्कृति दोनों को दर्शाएगा।
संगीत पाथवे का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि बनारस की आत्मा को सजीव करना है। यह मार्ग हर संगीत प्रेमी को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा पर ले जाएगा।












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