उत्तराखंड में चुनावी शंखनाद के साथ ही सियासी दलों ने भरी हुंकार, बड़ा सवाल अबकी बार किसकी सरकार

उत्तराखंड में चुनावी शंखनाद के साथ ही सियासी दलों ने भरी हुंकार

देहरादून, 8 जनवरी। उत्तराखंड में 14 फरवरी को 70 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा। जबकि 10 मार्च को परिणाम आने के बाद नई सरकार का गठन होगा। ऐसे में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत कई दल तैयारियों में जुट गए हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की 57 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत की सरकार सत्ता में आई। कांग्रेस 11 और अन्य 2 सीटें ही जीत पाई। ऐसे में इस बार हर राजनीतिक दल अपने-अपने दावे करने में जुट गए हैं।

 With the election conch shell in Uttarakhand, political parties filled the slogan, whose government this time is the big question

21 साल कई मिथक और रिकॉर्ड बने हैं अब तक
उत्तराखंड में हर चुनाव में मिथक को लेकर भी सभी सियासी दलों की नजर रहती है। गंगोत्री विधानसभा से चुनाव जीतने वाली पार्टी की सरकार आना और रानीखेत से चुनाव जीतने वाले को विपक्ष में बैठने जैसे मिथक अभी तक सही साबित हो रहे है। साथ ही चार बार विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं, लेकिन किसी भी दल की दोबारा सरकार नहीं आई। हालांकि एक के बाद एक भाजपा और कांग्रेस को सत्ता की चाबी मिली। इसके अलावा चुनाव के बाद कोई भी मुख्यमंत्री रहते चुनाव नहीं जीत पाया। इस बार चुनाव में ​मिथक ​सही साबित होते हैं और जो इतिहास रहा, वो कायम रहता है या नए रिकॉर्ड बनते हैं। इन पर भी सबकी निगाहें जरुर टिकी रहेंगी।

सबकी रणनीति तैयार
भाजपा जहां युवा सरकार और मोदी के चेहरे के सहारे दोबारा प्रचंड बहुमत की सरकार आने का दावा कर रही है। वहीं कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर और हरीश रावत की लोकप्रियता का सहारा है। पहली बार उत्तराखंड में तीसरे विकल्प के तौर पर चुनावी मैदान में दम दिखाने में जुटी आम आदमी पार्टी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के चेहरे और कर्नल अजय कोठियाल पर दांव लगा चुकी है। इसके अलावा क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल और बसपा आदि कई दल भी उत्तराखंड में अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए मैदान में उतरेंगे। ऐसे में 2022 का विधानसभा चुनाव इस बार दिलचस्प होता नजर आ रहा है।

हरदा का दावा, उत्तराखंड की जनता भाजपा सरकार की विदाई के लिए तैयार बैठी
कोविड के रिकॉर्ड केस आने के साथ ही उत्तराखंड में चुनावी शंखनाद हो गया है। चुनाव का शंखनाद करने के साथ ही सभी सियासी दल अपने-अपने जीत के दावे करने लग गए हैं। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चुनाव आयोग की ओर से 14 फरवरी को मतदान का दिन तय किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उत्तरखंड की जनता इस दिन भाजपा सरकार की विदाई करने के लिए तैयार बैठी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंडियत को आघात पहुंचाने वाले सरकार को इस बार जतना उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने राज्य में आचार संहिता लागू होने से पूर्व विभिन्न पदों पर सरकार की ओर से की गई नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। हरीश रावत ने कहा कि इस राज्य में युवाओं के सपनों को रौंदने वाली, विकास को चौपट करने वाली, जनता पर महंगाई को लादने वाली, नदी नाले-गाड़ गधेरों को रौंदने वाली वाली सरकार की विदाई का समय अब करीब आ गया है। उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से ऑनलाइन नामांकन, डोर-टू-डोर अभियान के लिए मात्र पांच व्यक्तियों की अनुमति जैसे निर्णयों का स्वागत किया। इधर आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया में पोस्टर जारी कर अपनी जीत का दावा किया है। आप ने कुछ नए पोस्टर और स्लोगन जारी किए हैं।​ जिसमें 10 मार्च भाजपा, कांग्रेस होंगी साफ और 10 मार्च आ रहे हैं केजरीवाल और कोठियाल।

मुख्यमंत्री का बयान, लोकतंत्र के उत्सव का शुभारंभ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद सोशल मीडिया के जरिए बयान जारी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि

प्रिय प्रदेशवासियों उत्तराखण्ड में लोकतंत्र के उत्सव का शुभारंभ हो चुका है। मेरा आप से निवेदन है कि आप बढ़ चढ़कर चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लें और अधिक से अधिक संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करें।कोरोना एक चुनौती के रूप में हमारे मध्य उपस्थित है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही पूर्ण रूप से इस महामारी को हराने में सफल रहेंगे। मैं आशा करता हूं कि हम सभी कोरोना नियमों का पालन करते हुए लोकतंत्र के इस उत्सव को सफल बनाएंगे।

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