देहरादून में नियो मेट्रो ट्रेन का होगा संचालन या ठंडे बस्ते में डला प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार ने दे दिया जबाव

देहरादून में नियो मेट्रो ट्रेन का संचालन होगा या ये प्रोजेक्ट पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। देहरादून में नियो मेट्रो ट्रेन का प्रोजेक्ट एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने देहरादून में प्रस्तावित नियो मेट्रो ट्रेन का मुद्दा राज्यसभा में उठाया है।

जिसमें केंद्र सरकार द्वारा बताया गया कि इस परियोजना के मूल्यांकन, व्यवहार्यता और संसाधनों की उपलब्धता पर विमर्श प्रक्रिया जारी है। महेंद्र भट्ट द्वारा राज्यसभा में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री से नियो ट्रेन प्रॉजेक्ट को लेकर जानकारी मांगी।

Will Neo Metro train be operational in Dehradun or project be shelved central government answer

जिसमें पूछा गया कि देहरादून, उत्तराखंड में नियो मेट्रो चलाने के संबंध में सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन है और उसकी क्या स्थिति है? उसमें विलंब के क्या कारण हो सकते हैं और कब तक इसे पूर्ण किया जा सकता है?

जिसके उत्तर में आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू की तरफ से बताया गया कि देहरादून में मेट्रो नियो परियोजना का प्रस्ताव उनके मंत्रालय को प्राप्त हुआ था। मेट्रो प्रस्तावों की लागत अत्यधिक होती है और ये केंद्र सरकार में मूल्यांकन की गहन प्रक्रिया से गुजरते हैं, जिसमें शहर के लिए उपयुक्त परिवहन के अन्य लागत प्रभावी साधनों की संभावनाओं पर विचार करना शामिल है। ऐसी परियोजनाओं की स्वीकृति ऐसी मूल्यांकन प्रक्रिया के परिणाम, प्रस्ताव की व्यवहार्यता और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

बता दें कि देहरादून और अन्य प्रमुख शहरों में ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को देखते हुए कई बार मेट्रो और नियो रेल के प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र को भेजा जा चुका है। लेकिन हर बार किसी न किसी तरह से इसमें बाधा उत्पन्न हो रही है।

देहरादून के लिए नियो मेट्रो की परियोजना तैयार की गई थी। परियोजना की शुरुआती लागत 1,852 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन समय के साथ यह बढ़कर 2,300 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। अधिक लागत को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी इस परियोजना में रुचि नहीं दिखाई।

परियोजना को जीवित रखने के लिए राज्य सरकार ने इसे पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) के पास भेज दिया, लेकिन वहां भी इसकी वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर संदेह बना हुआ है। जानकारों का मानना है कि इस योजना से​ राजस्व का नुकसान अधिक होगा और कमाई भी उतनी नहीं होगी। इसी तरह हरिद्वार में प्रस्तावित पाड टैक्सी परियोजना को लेकर भी सामने आई। अगस्त 2023 में इसके लिए टेंडर निकाले गए थे, लेकिन किसी भी निजी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।

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