केदारनाथ में ही गर्भ गृह तक जाने की क्यों है छूट, क्या है केदारनाथ का इतिहास, जानें पूरी खबर
केदारनाथ में गर्भ गृह तक जाने की है छूट
देहरादून, 7 अक्टूबर। चारधाम में यात्रियों की संख्या को लेकर लगाया गया प्रतिबंध हटते ही धामों में रौनक लौट आई है। सबसे ज्यादा यात्री केदारनाथ दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार को केदारनाथ धाम में रिकॉर्ड 2300 यात्रियों ने दर्शन किए। केदारनाथ में यात्रियों को गर्भ गृह के दर्शन करने की अनुमति मिली है। जबकि बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में श्रद्धालु बाहर से ही दर्शन करते हैं। क्या है केदारनाथ में गर्भ गृह का दर्शन का लाभ। जानते हैं।

चारधाम और पंच केदार में से एक है केदारनाथ
केदारनाथ मन्दिर उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्ध मंदिर है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहां की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया।

दक्षिण भारत से हैं रावल
केदारनाथ जी के तीर्थ पुरोहित इस क्षेत्र के प्राचीन ब्राह्मण हैं, उनके पूर्वज ऋषि-मुनि भगवान नर-नारायण के समय से इस स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की पूजा करते आ रहे हैं। पांडवों के पोते राजा जनमेजय ने उन्हें इस मंदिर में पूजा करने का अधिकार दिया था, और वे तब से तीर्थयात्रियों की पूजा कराते आ रहे हैं। आदि गुरु शंकराचार्य के समय से यहां पर दक्षिण भारत से जंगम समुदाय के रावल व पुजारी मंदिर में शिव लिंग की पूजा करते हैं, जबकि यात्रियों की ओर से पूजा इन तीर्थ पुरोहित ब्राह्मणों द्वारा की जाती है।

स्वयंभू शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं यात्री
स्वयंभू शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं यात्री
मन्दिर में मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ
यह मन्दिर एक छह फीट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मन्दिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नन्दी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मन्दिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है, कहा जाता है कि इस मन्दिर का जीर्णोद्धार आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था। मन्दिर को तीन भागों में बांटा जा सकता है गर्भ गृह , मध्यभाग और सभा मण्डप । गर्भ गृह के मध्य में भगवान श्री केदारेश्वर जी का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग स्थित है जिसके अग्र भाग पर गणेश जी की आकृति और साथ ही मां पार्वती का श्री यंत्र विद्यमान है । ज्योतिर्लिंग पर प्राकृतिक यगयोपवित और ज्योतिर्लिंग के पृष्ठ भाग पर प्राकृतिक स्फटिक माला को आसानी से देखा जा सकता है ।श्री केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग में नव लिंगाकार विग्रह विधमान है इस कारण इस ज्योतिर्लिंग को नव लिंग केदार भी कहा जाता है। श्री केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के चारों ओर विशालकाय चार स्तंभ विद्यमान है जिनको चारों वेदों का धोतक माना जाता है , जिन पर विशालकाय कमलनुमा मन्दिर की छत टिकी हुई है । ज्योतिर्लिंग के पश्चिमी ओर एक अखंड दीपक है जो कई हजारों सालों से निरंतर जलता रहता है जिसकी हेर देख और निरन्तर जलते रहने की जिम्मेदारी पूर्व काल से तीर्थ पुरोहितों की है। गर्भ गृह में स्थित चारों विशालकाय खंभों के पीछे से स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान श्री केदारेश्वर जी की परिक्रमा की जाती है । केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित पुरूषोत्तम तिवारी का कहना है यहां स्वयम्भू शिवलिंग है। शिवलिंग को जल, दूध, दही आदि द्रव्य पदार्थ चढ़ते हैं। जिस वजह से यहां पर यात्रियों को गर्भ गृह में जाने दिया जाता है। दूसरे मंदिरों में मूर्ति रूप में होने की वजह से गर्भ गृह तक जाने पर प्रतिबंध होता है। ऐसे में केदारनाथ धाम में ही यात्रियों को गर्भ गृह जाने की परमिशन है।












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