उत्तराखंड में राज्य सरकार की रासुका के पीछे रणनीति को लेकर कांग्रेस क्यों हुई हमलावर, जानिए पूरा मामला
उत्तराखंड में राज्य सरकार ने रासुका को 3 माह तक के लिए बढाया, कांग्रेस हमलावर
देहरादून, 5 अक्टूबर। उत्तराखंड में राज्य सरकार ने हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने के जिलाधिकारियों को अधिकार को 3 माह तक के लिए बढ़ा दिया गया है। सरकार ने बीते कुछ समय में राज्य में हुई हिंसक घटनाओं, राज्य कर्मचारियों के आंदोलन और लखीमपुर खीरी की घटना के बाद उत्तराखंड में यह फैसला लिया है। जिसके बाद चुनावी साल में विपक्ष एक बार फिर राज्य सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया है।

अधिकारों को 3 माह के लिए बढ़ाया गया
उत्तराखंड में चुनावी साल में राज्य सरकार किसी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। इसके लिए हर तरह के कदम उठाए गए हैं। रुड़की में एक चर्च में हुई हिंसा, ऊर्जा निगम कर्मचारियों की हड़ताल, आंदोलनों के अलावा किसानों का विरोध और लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा जैसी घटनाओं को लेकर राज्य सरकार अलर्ट हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार की और से रासुका के तहत जिलाधिकारियों के मिलने वाले अधिकारों को 3 माह तक बढ़ा दिया गया है। गृह विभाग की जारी अधिसूचना में कहा गया है कि कुछ जिलों में हिंसा की घटनाएं हुई हैं और उनकी प्रतिक्रिया में राज्य के अन्य भागों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। राज्य के अन्य भागों में भी ऐसी घटनाएं होने की संभावना है।
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हरीश रावत बोले, आवाज उठाने को लीड करूंगा
पूर्व सीएम हरीश रावत ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि
हमारे राज्य में रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत जिलाधिकारियों को असीमित अधिकार दे दिए गए हैं। पहले कर्मचारी और बिजली कर्मचारियों की हड़तालों को रोकने के लिए एस्मा की बात हो रही थी। अब कई कदम आगे बढ़कर लोकतंत्र का गला घौटने के लिए रासुका लगाई जा रही है। सरकार कारण तो बताएं कि क्यों रासुका लगाने की आवश्यकता पड़ रही है? हरीश रावत ने कहा कि रुड़की में एक धर्मस्थल में कुछ लोगों ने जिस तरीके से घुसकर के गुंडागर्दी, मारपीट की है वो जरूर फिट केस हो सकते हैं रासुका के लिए। क्या हिम्मत है राज्य_सरकार को कि उनको रासुका के अंदर बुक करें? यदि लोकतांत्रिक आंदोलनों, स्वरों को दबाने के लिए, आप रासुका की धमकी दे रहे हैं तो इस धमकी से लोकतंत्र प्रेमी लोग डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रासुका के खिलाफ भी आवाज उठेगी, प्रबल तरीके से उठेगी और मैं उस आवाज को लीड देने का काम कर रहा हूं।

3 जिलों पर सरकार की नजर
उत्तराखंड में तीन जिले सबसे संवेदनशील हैं। जहां पिछले दिनों में सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हुई हैं। इनमें हरिद्वार जिले के रुड़की में चर्च में हिंसा, के दूसरा यूपी राज्यों में हिंसा का असर यूएसनगर जिले में और तीसरा देहरादून जिला, जहां सबसे ज्यादा कर्मचारियों के आंदोलन हो रहे हैं। इसमें बिजली विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल के मामले शामिल हैं। इस तरह से हिंसक घटनाओं की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कानून लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालांकि विपक्ष को लगता है कि चुनावी साल में सरकार कर्मचारियों और नेताओं की आवाज को दबाने के लिए भी इस तरह के कदम उठा रही है।












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