हरक सिंह ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा को क्यों कहा 4 साल चाय पीने तक नहीं आए, जानिए सियासी मायने
हरक सिंह ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा को कहा 4 साल चाय पीने तक नहीं आए
देहरादून, 29 अक्टूबर। उत्तराखंड में कैबिनेट मंंत्री हरक सिंह रावत के कांग्रेस में जाने की चर्चा और भाजपा के डेमेज कंट्रोल को लेकर सियासी दावों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के दावों पर भी हरक सिंह रावत ने एक बार फिर पानी फेरने का काम किया है। इतना ही नहीं हरक सिंह रावत ने तंज कसते हुए विजय बहुगुणा को कहा कि 4 साढ़े 4 साल विजय बहुगुणा उनकी चाय पीने तक नहीं आए। संकेत साफ है कि हरक सिंह रावत अब विजय बहुगुणा से भी दूरी बना रहे हैं।
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विजय बहुगुणा से दूरी बना रहे हरक
उत्तराखंड में पुराने कांग्रेसियों को मनाने के लिए जिस तरह से भाजपा ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा को देहरादून भेजा था, विजय बहुगुणा इस टास्क में फिलहाल फेल नजर आ रहे हैं। खुद हरक सिंह रावत विजय बहुगुणा से कन्नी काटते हुए नजर आ रहे हैं। विजय बहुगुणा ने दावा किया था कि सभी कांग्रेस से आए नेता एकजुट हैं। इतना ही नहीं विजय बहु्गुणा ने ये भी दावा किया था कि सब एकजुट रहेंगे। लेकिन ऐसा दिखता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हरक सिंह रावत अपने बयानों के लिए खासे चर्चा में रहते हैं। पहले पूर्व सीएम हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोला और उसके बाद हरीश रावत को बड़े भाई कहकर एकजुट होने के संकेत दिए। लेकिन विजय बहुगुणा को लेकर हरक सिंह ने दूसरे संकेत दे दिए। हरक का विजय बहुगुणा को लेकर तंज कसना कि 4 साल में एक बार भी चाय पीने न आना। साफ संकेत है कि वे विजय बहुगुणा से नाराज हैं। इस बात के भी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हरक सिंह रावत जिस तरह से बयानबाजी कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक से मुलाकात हो या विजय बहुगुणा से मिलना हरक सिंह भाजपा से मोहभंग की और इशारा कर रहा है। साथ ही हरीश रावत को लेकर ह्रदय परिवर्तन भी नए समीकरण बनने के संकेत दे रहे हैं। जिससे आने वाले दिनों में बड़ा फेरबदल होने का भी इशारा है।
बदल गए अब समीकरण
2016 में जब कांग्रेस में हरीश रावत के खिलाफ बगावत हुई थी तो विजय बहुगुणा ने हरक सिंह के साथ पूरी टीम का नेतृत्व किया था। इस टीम में 9 विधायक थे। 9 में से 6 दोबारा विधायक चुनकर आए। विजय बहुगुणा ने अपने बेटे सौरभ को सितारंगज से टिकट दिलाकर विधायक बनवा दिया। इसके बाद से विजय बहुगुणा उत्तराखंड की राजनीति में कम ही नजर आए। अब अचानक से विजय बहुगुणा के देहरादून आकर सक्रिय होने से भाजपा और कांग्रेस दोनों में सियासत गर्मा गई है। विजय बहुगुणा ने कांग्रेस में भी बड़ा बदलाव होने के संकेत दिए। लेकिन जिन हरक सिंह रावत को मनाने आए थे, वे विजय बहुगुणा से नाराज दिख रहे है। हरक सिंह रावत की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए विधायकों और नेताओं में लंबे समय से एकजुटता नहीं है। जब भाजपा की सरकार आई थी तो सभी बागियों ने एकजुटता दिखाई। जीतकर आए बागियों में 5 को मंत्री बनाया गया। सुबोध उनियाल और रेखा आर्य पूरी तरह से भाजपा के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। सतपाल महाराज समय-समय पर नाराजगी दर्ज कराते हैं। सिर्फ हरक सिंह और उमेश शर्मा एक साथ नजर आते हैं। ऐसे में पुराने कांग्रेसियों में अब एकजुटता नहीं है। जिस वजह से हरक सिंह प्रेशर पॉलिटिक्स नहीं कर पा रहे हैं।












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