लोकसभा चुनाव में हार का जिम्मेदार कौन,कारणों का पता लगाएगी कांग्रेस,क्या बयानबाजी और गुटबाजी पर लगेगी लगाम

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अब हार की समीक्षा करने जा रही है। पीएल पुनिया की अगुवाई में हाईकमान ने एक कमेटी बनाई है, जो हार के कारणों का पता लगाएगी।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य पूर्व सांसद पी.एल. पूनिया और सांसद रजनी पाटिल 18 जुलाई से 20 जुलाई तक उत्तराखण्ड के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे।

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ये जानकारी उत्तराखंड कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन एवं प्रशासन मथुरादत्त जोशी ने दी है। उत्तराखंड दौरे के दौरान कमेटी के सदस्य पांचों संसदीय क्षेत्रों के पूर्व सांसद, सांसद प्रत्याशी, विधायक, पूर्व विधायकों, एआईसीसी, पीसीसी सदस्यों, जिला, ब्लॉक, नगर कांग्रेस अध्यक्षों और अनुषांगिक संगठन, विभाग और प्रकोष्ठ के अध्यक्षगणों के साथ मुलाकात करेंगे।

कांग्रेस के अंदर हार के कारणों को लेकर लगातार बयानबाजी जारी है। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सीनियर नेताओं के चुनाव न लड़ने को लेकर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद ये विवाद बढ़ता जा रहा है। इस पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी आपत्ति जताई थी।

ऐसे में हाईकमान को इस जुबानी जंग को बंद कराने के लिए भी हार की वजह तलाशने के लिए कमेटी बना दी। जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस के सीनियर नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग बंद हो जाएगी।

4 जून को आए लोकसभा के परिणामों में कांग्रेस को पांचों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने इस बार टिहरी से जोत सिंह गुनसोला, पौड़ी गढ़वाल से गणेश गोदियाल, अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा, हरिद्वार से वीरेंद्र रावत और नैनीताल सीट से प्रकाश जोशी को मैदान में उतारा। लेकिन किसी भी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा के प्रत्याशियों को टक्कर देते हुए नजर नहीं आए। हार के बाद से कांग्रेस के अंदर सियासी घमासान मचा हुआ है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इसके लिए सीनियर नेताओं का चुनाव न लड़ना बड़ी वजह बताई। उनका इशारा पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को माना जा रहा है। हरीश रावत पहले हरिद्वार सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन आखिर में उन्होंने अपने बेटे वीरेंद्र को टिकट दिलवा दिया। यशपाल आर्य को पार्टी अल्मोड़ा से चुनाव लड़वाना चाहती थी, लेकिन आर्य नैनीताल सीट पर खुद को ज्यादा सुरक्षित मान रहे थे।

प्रीतम सिंह पिछला चुनाव टिहरी से लड़ चुके हैं। लेकिन इस बार वे पहले ही चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके थे। इस तरह पार्टी ने फिर दूसरा विकल्प चुना। जिसकी वजह से पार्टी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। करन माहरा के बड़े नेताओं के चुनाव लड़ने के बयान पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने पलटवार कर जबाव दे दिया। उनका कहना है कि सीनियर लड़ते तब भी कांग्रेस की हार होती। हां हार का अंतर शायद कम रह सकता था। ऐसे में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

जिससे साफ लगता है कि बड़े नेताओं को पहले ही पार्टी की हार का अंदेशा था। इस वजह से वे मैदान से बाहर हो गए। इसके अलावा कांग्रेस के बड़े चेहरे और स्टार प्रचारक पूरे प्रदेश में एक साथ नजर नहीं आए। हरीश रावत हरिद्वार से बाहर नहीं गए। प्रीतम सिंह टिहरी तक सीमित रहे। केंद्र से भी प्रियंका गांधी की दो और सचिन पायलट की एक रैली हुई। इस तरह ये माना जा रहा है कि पहले ही कांग्रेसी हार मान चुके थे। अब समीक्षा होगी तो खुलकर सारी बातें सामने आएंगी और फिर गुटबाजी होना तय है।

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