क्या होता है समान नागरिक संहिता, गोवा के यूसीसी का पुर्तगाली कनेक्शन,उत्तराखंड ऐसे बना रहा इतिहास, जानिए सबकुछ
Uniform Civil Code उत्तराखंड की धामी सरकार जल्द ही देवभूमि में समान नागरिक संहिता लागू करने जा रही है। इसके बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा। हालांकि गोवा में पहले से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है।

लेकिन गोवा में लागू यूसीसी पुर्तगाल सरकार ने ही लागू किया था। वर्ष 1961 में गोवा सरकार इस सिविल कोड के साथ ही बनी थी। भारत के गोवा में समान नागरिक संहिता लागू है। गोवा को विशेष राज्य का दर्जा मिलने के साथ-साथ राज्य में यूसीसी भी लागू है। संसद से गोवा को ऐसा अधिकार दिया गया था कि वह पुर्तगाली सिविल कोड लागू कर सकता है।
गोवा में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक समान कानून है। गोवा में शादी या तलाक कोर्ट या रजिस्ट्रेशन द्वारा ही कानूनी तौर पर मान्य होता है।उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड की कैबिनेट ने खुद इसे लागू करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए पहले खुद ड्राफ्ट तैयार करवाया गया है।
माना जा रहा है कि उत्तराखंड का यूसीसी पूरे देश के लिए पेम्पलेट बनेगा। पुर्तगालियों ने गोवा पर 451 वर्षों तक शासन किया। यह अंग्रेजों से भी काफी ज्यादा था। पुर्तगाली वर्ष 1510 में भारत आने वाले पहले यूरोपी शासक थे। इसके साथ ही वह सबसे आखिर में वर्ष 1961 में उपनिवेश छोड़ने वाले यूरोपी शासक थे।
समान नागरिक संहिता यानी कि एक देश एक कानून। समान नागरिक संहिता के तहत देश में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों के लिए एक कानून होगा। समान नागरिक के तहत विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना, संपत्ति के बंटवारे जैसे विषय आते हैं। फिलहाल भारत में ऐसा नहीं है।
भारत में समान नागरिक संहिता लागू नहीं है, यहां कई निजी कानून धर्म के आधार पर तय हैं। भारत में हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध के लिये एक व्यक्तिगत कानून है। वहीं, मुसलमानों और इसाइयों के लिए उनके अपने कानून हैं। इस्लाम धर्म के लोग शरीअत या शरिया कानून को मानते हैं, जबकि अन्य धर्म के लोग भारतीय संसद द्वारा तय कानून को सर्वोपरी मानते हैं। उत्तराखंड राज्य इस कानून को लागू करने के लिए निर्णय लेने वाला देश में पहला राज्य बन गया है।












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