Uttarkashi: धराली में बादल नहीं फटा! केदारनाथ जैसी आपदा, ग्लेशियोलोजिस्ट और एक्सपर्ट्स ने बताया हुआ क्या?
Uttarkashi Dharali news उत्तरकाशी के धराली में आई प्राकृतिक आपदा ने धराली कस्बा ही नहीं कई परिवारों को जिंदगी भर न भुलने वाला दर्द दिया है। सेकेंडों में जिस तरह पानी और गाद ने मिलकर जो कहर बरपाया, उससे पूरा धराली गांव तहस नहस हो गई। कई लोग लापता है।
बाजार, घर, होम स्टे और होटल ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। धराली में आई प्राकृतिक आपदा की वजह स्थानीय लोगों ने बादल फटने को माना है। जो कि अक्सर पहाड़ों में सामान्य तौर पर जब भी कोई बड़ी त्रासदी को माना जाता है। लेकिन धराली की घटना बादल फटने से हुई या इसकी वजह कुछ और है।

इसको लेकर वन इंडिया ने वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान से रिटायर्ड साइंटिस्ट ग्लेशियोलोजिस्ट डॉ डीपी डोभाल से बात की। जो कि हिमालय और ग्लेशियर पर कई सालों से अध्ययन करते आ रहे हैं और केदारनाथ आपदा के कारण और वहां के हालातों को लेकर लंबे समय तक रिसर्च कर चुके हैं। डॉ डीपी डोभाल का कहना है कि धराली में जो घटना हुई उसका टाइम, लोकेशन और परिस्थितियां समझनी होगी। एक तो बारिश का समय और दूसरा धराली की लोकेशन।
बादल फटने की वजह से ये हुआ ऐसा नहीं
इस दोनों बातों पर गौर करें तो पहले उस दिन की आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार बादल फटने के लिए जो बारिश होनी चाहिए। वह धराली में उस दिन नहीं हो रही थी। यानि अत्यधिक वर्षा - 100 मिमी (10 सेमी) से अधिक बारिश एक घंटे के भीतर। इसके साथ ही धराली 9 हजार फीट हाई एल्टीट्यूड पर बसा है। जहां ऐसी घटना और इतनी बारिश कम होती है। डॉ डोभाल का कहना है तो ऐसे में साफ है कि बादल फटने की वजह से ये हुआ ऐसा नहीं कहा जा सकता है।
लगता है कि वहां से एवलांच आया हो
दूसरा उन्होंने बताया कि खीर गंगा जहां से आती है, वहां ग्लेशियर है। साथ ही दो हेंगिग ग्लेशियर भी। ऐसे में ये लगता है कि वहां से एवलांच आया हो। दूसरा इतना पानी और गाद कहां से आया। ये भी समझने की बात है। खीर गंगा की वैली बहुत ज्यादा चौड़ी नहीं है। हो सकता है वहां लैंडस्लाइड हुआ हो या रॉक फॉल हुआ हो। जिसने पानी चोक कर दिया। कई समय या दिनों तक पानी रुका रहा और जब इकट्ठा हुआ तो फिर नीचे ब्लस्ट हो गया और फिर तबाही मचा दी।
केदारनाथ में भी कुछ इसी तरह की घटना
रास्ते में जो भी मलबा, पत्थर, पेड़, पानी रहा सब सैलाब बनकर आ गया। उन्होंने कहा कि आगे अध्ययन से ही पता चलेगा कि आखिर हुआ क्या। इसके साथ ही वहां ग्लेशियर में क्रेक भी हैं। जिससे एवलांच हुआ हो। ऐसा भी संभव है। केदारनाथ आपदा को लेकर उन्होंने बताया कि केदारनाथ में भी कुछ इसी तरह की घटना हुई। बारिश का पानी जगह जगह रुकता रहा। फिर लेक टूटने से एवलांच गिरा और एक झटके में तबाही मचा दी। उन्होंने बताया कि धराली की आपदा भी केदारनाथ और बाण गंगा से मिलती जुलती घटना है।












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