Uttarakhand: 10 दिन, 240 घंटे, 41 मजदूरों को बचाने में जुटी 6 एजेंसियां, जानिए मिशन सिलक्यारा की 10 बड़ी बातें
दिवाली की सुबह 12 नवंबर को उत्तरकाशी टनल में काम कर रहे 41 मजदूर बाहर आते समय अचानक हुए भूस्खलन की वजह से अंदर फंस गए। आज मजदूरों को टनल के अंदर 10 दिन पूरे हो गए हैं। 10 दिन में टनल के अंदर फंसे मजदूरों को 240 घंटे से ज्यादा का समय हो गया। अब 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए 6 एजेंसियां संभाल रेस्क्यू अभियान संभाल रही हैं। आइए जानते हैं इस पूरे रेस्क्यू अभियान से जुड़ी 10 बड़ी बातें--

दिवाली की सुबह 12 नवंबर को जैसे ही पूरा देश दिवाली मनाने की तैयारी में जुटने लगा। इस बीच उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा से डंडालगांव तक निर्माणाधीन सुरंग के अंदर भूस्खलन होने की खबर सामने आई। बताया गया कि 40 मजदूर अंदर फंसे हैं। जिनकी संख्या अब 41 पहुंच गई है।
खबर सामने आते ही प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक हड़कंप मच गया। आनन फानन में एम्बुलेंस, फायर और अन्य सुरक्षा उपकरण मौके पर पहुंचाए गए। इस बीच बचाव अभियान में तेजी आने की खबर आई। फंसे हुए मजदूर तक पानी के लिए बिछाए गए पाइप के जरिए ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की गई।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को राहत और बचाव के कार्य में लगाया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उत्तरकाशी के डीएम रुहेला से बात की है और इस घटना के बाद स्थिति की जानकारी ली। साथ ही उन्हें इस रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए कहा गया है। पाइप के जरिए खाने का कुछ सामान भेजने की बात सामने आई।
अगले दिन 13 नवंबर को रेस्क्यू से जुड़ा हेल्पलाइन नंबर 7455991223 जारी किया गया है। फंसे मजदूरों की लिस्ट जारी की गई, जिसमें उत्तराखंड के कोटद्वार व पिथौराढ़ के दो समेत बिहार के 4, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2, झारखंड के 15, उत्तरप्रदेश के 8, हिमाचल का एक और ओडिशा के पांच शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौके पर पहुंचे। बचाव और राहत कार्य का जायजा लिया। केंद्रीय एजेंसियों से संपर्क साधा गया। मदद भी मांगी गई। उन्होंने सभी को धैर्य बनाए रखने की अपील की। इस बीच जानकारी आई कि बचाव दल सुरंग में 15 मीटर तक पहुंच गया है। अभी लगभग 35 मीटर और मलबा साफ करना होगा। बताया गया कि फंसे हुए मजदूर सुरक्षित हैं। उन्हें पाइप के जरिए खाना और पानी के साथ ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।
आपदा प्रबंधन सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बताया कि जिस स्थान पर मजदूर हैं, वहां करीब पांच से छह दिन के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन है। इसके अलावा पाइपलाइन से भी ऑक्सीजन भेजी जा रही है।
14 नवंबर को सूचना आई कि सरकार ने अब तीन प्लानिंग पर काम करना शुरू कर दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से रेस्क्यू अभियान का अपडेट लिया। मुख्यमंत्री धामी ने मजदूरों के परिजनों से भी बात की। टनल के अंदर मलबा आने से रेस्क्यू टीमों को परेशानी होने लगी।
इसके बाद 900 मिमी व्यास के पाइप व ऑगर ड्रिलिंग मशीन साइट पर पहुंचाई गई। ऑगर मशीन के लिए प्लेटफार्म तैयार कर ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ। इस बीच पाइप से मजदूरों से बातचीत करने का वीडियो सामने आया। अधिकारियों और परिजनों ने अंदर फंसे मजदूरों से पाइप के जरिए बात की। सभी सकुशल बताए गए।
15 नवंबर को सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की तबियत बिगड़ने की खबर सामने आई। जिससे नाराज परिजन और दूसरे मजदूर आक्रोशित नजर आए। और घटनास्थल के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया।
16 नवंबर को मजदूरों को बाहर निकालने के लिए केंद्र और सेना की टीमें भी सिलक्यारा पहुंची। हेवी मशीनों को घटनास्थल पर पहुंचाने के लिए सेना की मदद ली गई।बताया गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में अब नार्वे और थाइलैंड की विशेष टीमों की भी मदद ली जा रही है।
केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने रेस्क्यू में जुटी सभी टीमों से बातचीत की और मजदूरों के परिजनों से बातचीत कर आश्वासन दिया। नई एडवांस ऑगर मशीन से ड्रिलिंग का काम शुरू किया गया। पाइपों से एस्केप टनल तैयार कर मजदूरों को बाहर निकालने का दावा किया गया।
17 नवंबर को फिर से रेसक्यू अभियान में अमेरिकन ऑगर मशीन से की जा रही ड्रिलिंग करते हुए पाइप फंसने की बात सामने आई। इस बीच बैकअप प्लान पर भी काम शुरू हुआ। इंदौर से नई मशीन का इंतजार शुरू हो गया। जबकि चेन्नई से कुछ पार्ट्स घटनास्थल पर पहुंचाए गए। स्थानीय लोगों की मांग पर NHIDCL ने टनल के बाहर मंदिर स्थापित कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बोखनाग का मंदिर बनाने से काम होगा, जो कि इलाके के क्षेत्ररक्षक माने जाते हैं।
18 नवंबर को पीएमओ और विदेशी विशेषज्ञों ने सिलक्यारा में मोर्चा संभाला। पीएमओ में उपसचिव मंगेश घिल्डियाल, पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद और भूविज्ञानी वरुण अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पीएमओ की टीम के साथ ही इंजीनियरिगं विशेषज्ञ अरमांडो कैपेलन और माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद 6 तरीके से काम करने के लिए प्लानिंग तैयार की गई।
19 नवंबर को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी उत्तरकाशी में रेस्क्यू कार्यों का जायजा लेने पहुंचे हैं। साथ में सीएम पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। गडकरी ने परिजनों और एक्सपर्ट से बातचीत की।
20 नवंबर को टनल के अंदर एक और 6 इंच का पाइप डाला गया जिसकी मदद से श्रमिको को भोजन, पानी और ऑक्सीजन भेजने की तैयारियां शुरू हुई। रात में श्रमिकों को पका हुआ भोजन खिचड़ी भेजी गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर के टनल विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स उत्तरकाशी के सिलक्यारा पहुंचे। सीएम धामी ने श्रमिकों की कुशलक्षेम पूछने आ रहे लोगों की पूरी व्यवस्था करने और ऐलान किया कि खर्चा सरकार उठाएगी।
आज घटना के 10 दिन बाद एंडोस्कोपी फ्लेक्सी कैमरा भेजा गया, जिसके बाद सुरंग के अंदर की तस्वीर सामने आई। सभी मजदूर अंदर पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इसके साथ ही अब सामान्य भोजन भी अंदर भेजा जाने लगा है।टनल में 10 दिन से फंसे मजदूरों से अब सीधे बातचीत होने लगी है। जिसका वीडियो भी सामने आ गया है। इस वीडियो में श्रमिक स्वस्थ और सामान्य तरीके से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में सभी ने अब राहत की सांस ली है।












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