उत्तराखंड ने रचा इतिहास, यूसीसी के साथ ही राज्य आंदोलनकारियों का ये बिल भी ध्वनिमत से पास, जानिए क्यों है खास
उत्तराखंड विधानसभा ने आज इतिहास रच दिया है। समान नागरिक संहिता बिल को सदन ने ध्वनिमत से पास कर दिया है। इसके साथ ही राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण का बिल भी सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया है। सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

लंबे समय से राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिजनों को जिस बिल के पास होने का इंतजार था, वह बिल भी सदन में ध्वनिमत से पास हो गया है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिह्नित आंदोलनकारियों के सभी पात्र आश्रितों को भी राजकीय सेवा में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलेगा।
मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने समिति की रिपोर्ट सदन पटल पर रखी थी। जिसके बाद बुधवार को रिपोर्ट पर चर्चा के बाद विधेयक को मंजूरी दे दी गई। सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों का बड़ा योगदान है। आंदोलनकारियों की सुविधा, पेंशन बढ़ाने से लेकर हमने आरक्षण देने का काम किया है।
धामी सरकार ने आठ सितंबर 2023 को सदन में विधेयक पेश किया था। विधेयक में चिह्नित आंदोलनकारियों व उसके एक आश्रित सदस्य को क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया गया था। प्रवर समिति ने इसमें बदलाव करते हुए सभी पात्र आश्रितों को आरक्षण का योग्य माना है। साथ समिति ने आश्रित की परिभाषा में चिह्नित आंदोलनकारी की पत्नी अथवा पति, पुत्र एवं पुत्री जिसमें विवाहित, विधवा, पति द्वारा परित्यक्त, तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है।
प्रवर समिति ने ये सिफारिश भी की कि 11 अगस्त 2004 को या उसके बाद उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा समय.समय पर जारी शासनादेशों के अधीन विभिन्न राजकीय सेवाओंए पदों के लिए राज्य आंदोलनकारियों का चयन और नियुक्ति इस अधिनियम के तहत वैध माना जाए। जिस व्यक्ति का चिह्नीकरण सक्षम अधिकारी द्वारा राज्य आंदोलनकारी के रूप में किया गया होए उसे प्रमाणपत्र या पहचानपत्र जारी हो।
विधेयक में विभिन्न विभागों में तथा समूह घ के पदों पर सीधी भर्ती में नियुक्ति देने में आयु सीमा तथा चयन प्रक्रिया को एक बार शिथिल करने का प्रावधान के स्थान पर समिति ने राज्याधीन सेवाओं में चयन के समय चिह्नित आंदोलनकारियों या उनके आश्रितों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की सिफारिश की थी।












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