वो 30 सेंकेंड और सबकुछ खत्म, एवलांच हादसे से लौटकर आए रोहित भट्ट ने बताया कैसा था वो खौफनाक मंजर
उत्तरकाशी में आए एवलांच हादसे में सकुशल बचकर निकले रोहित
"मैं और एवरेस्टर सविता मैम आने वाले समय में मावउंटेनर को लेकर बातचीत कर रहे थे। हम प्लान कर रहे थे कि एशिया या आस्ट्रेलिया में पर्वतारोहण करने जाएंगे। सुबह के करीब 8 से 8:15 का समय रहा होगा। अचानक से एवलांच आया और 30 से 40 सेकेंड में सब खत्म हो गया। मुझे भी मुश्किल से 10 से 15 सेकेंड मिले जब मैंने खुद से एंकर हटा दिया। मैं भी क्रेवास में फंसा लेकिन किसी तरह बाहर निकल पाया। हमनें 4 बॉडी रिकवर की। आवाजें बहुत आ रही थी, लेकिन हम कुछ नहीं कर पाए।" उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन के हादसे में सकुशल बचकर निकले टिहरी जिले के रोहित ने वन इंडिया से बातचीत में उस घटना के बारे में विस्तार से बताया है। जो उनके साथ हादसा हुआ है।

हिमालय की चोटियों को छूने का सपना, माउंटनेरिंग का सपना पूरा करेगा
रोहित अब भी बात करते करते चुप हो रहा है। ज्यादा बात करने और हल्ला होने से वह परेशान हो रहा है। उसके सामने उसके दल के 29 लोग इस हादसे के शिकार हुए। रोहित इस हिमस्लखन में चोटिल हुआ है लेकिन रोहित का आत्मबल अभी भी नहीं टूटा है। रोहित का कहना है कि वह अब भी अपना माउंटनेरिंग का सपना पूरा करेगा। हिमालय की चोटियों को छूने का जो सपना रोहित ने देखा है कि वह उसको पूरा करने के लिए जल्द ही फिर से मैदान में उतरेगा। हालांकि उसे इस बात का दुख है कि वह अपने साथियों को नहीं बचा सका।

हादसे में मौत के मुंह से बचकर आए टिहरी के रोहित
4 अक्टूबर को नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 34 ट्रेनी और 7 इंस्ट्रैक्टर की टीम अपने कोर्स का सबमिट करने जा रहे थे। इसी दौरान एवलांच आने से 29 लापता हो गए। इनमें से 27 की बॉडी रिकवर हो गई है जबकि दो अब भी मिसिंग हैं। इस हादसे में मौत के मुंह से बचकर आए टिहरी के रोहित ने उस दिन का खौफनाक मंजर के बारे में बताया।

10 से 15 सेकेंड समय में 10 से 15 सेकेंड में रोहित ने खुद से एंकर हटाकर रस्सी से अलग कर दिया
रोहित ने बताया कि करीब सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर 34 ट्रेनी और 7 इंस्ट्रक्टर अपने टारगेट के लिए निकले। 5500 मीटर पर वे पहुंच गए थे। जहां से टारगेट 150 से 200 मीटर रह गया था। रोहित एवरेस्टर सविता कंसवाल के साथ चल रहे थे। वे दोनों भविष्य की प्लानिंग कर रहे थे कि आने वाले समय में कहां पर्वतारोहण के लिए जाने वाले हैं। इस बीच अचानक एवलांच आया। जो कि 60 फीट रहा होगा। सभी रोप के सहारे चल रहे थे। जिसमें एंकर लगा था। इस बीच एवलांच की चपेट में आने से सब गहरी खाई में चले गए। मुश्किल से 10 से 15 सेकेंड समय में रोहित ने खुद से एंकर हटाकर रस्सी से अलग कर दिया।

हिम्मत कर 4 बॉडी रिकवर की
थोड़ी देर वह भी पास में खाई में गिरा लेकिन किसी तरह हिम्मत कर बाहर निकला। इसके बाद हिम्मत कर 3 ट्रेनी 1 जेरी सर को बाहर निकाला। 4 बॉडी रिकवर की जिसमें सविता कंसवाल और नौमी रावत शामिल थी। इसके बाद आगे कुछ नजर नहीं आ रहा था। आवाजें आ रही थी, लेकिन कुछ नहीं कर पाए। इसके बाद बैस कैंप के लिए चले। जहां पर 2 मिनट में पहुंच जाते हैं, उस रास्ते को पूरा करने में आधे घंटे का समय लग रहा था। रात को 9:30 बजे बेस कैंप पहुंचे। इसके बाद इलाज शुरू हुआ। अगले दिन हेली से उत्तरकाशी आए।

एवलांच हादसे के दिन ही हुई रोहित के भाई की मेंहदी
रोहित के परिवार में पिता जगदंबा भट्ट, मां दुर्गा, भाई दीपक और बहिन दीक्षा हैं। जिस दिन ये घटना हुई उसी दिन रोहित के भाई दीपक की मेंहदी का कार्यक्रम था। जैसे ही मेंहदी का कार्यक्रम शुरू हुआ तो कुछ देर में एसपी कार्यालय उत्तरकाशी से फोन आया। फोन पर रोहित के पिता को जानकारी दी गई कि आपका बेटा सेफ है। रोहित के पिता डर गए लेकिन फिर ये बात छुपाकर किसी को इस बात की जानकारी नहीं होेने दी कि रोहित घायल है। अगले दिन रोहित के भाई की शादी सम्पन्न हुई। पिता ने किसी को इस बात की जानकारी नहीं दी। सुबह 9 बजे किसी ने रोहित से उसके पिता की बात कराई।

रोहित के सामने अब भी वह घटना और खौफनाक मंजर
जब रोहित से पिता की बात हो गई तो फिर रोहित के भाई की शादी का आयोजन पूरा होने के बाद रात में ही पिता अकेले उत्तरकाशी के लिए निकल गए। अगले दिन सुबह हेली से एम्स ऋषिकेश लाया गया और फिर एक दिन हॉस्पिटल में रूकने के बाद रोहित ने अपनी मां से मिलने की इच्छा जताई। रोहित के सामने अब भी वह घटना और खौफनाक मंजर आ रहा है। जिससे उसकी बार-बार मनोस्थिति ठीक नहीं हो रही है। इसके लिए वह डॉक्टर से भी सलाह ले रहे हैं।












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