उत्तराखंड में भर्ती घोटाले की जांच का असर, दिल्ली से लेकर देहरादून तक चढ़ा सियासी पारा, हो सकता है उलटफेर

उत्तराखंड भाजपा के दो दिग्गजों की हाईकमान से मुलाकात के सियासी मायने

देहरादून, 8 सितंबर। उत्तराखंड में भर्ती घोटाले को लेकर भाजपा हाईकमान अब सख्त नजर आ रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी हाईकमान किसी तरह का रिस्क नहीं उठाना चाहती है। हाईकमान पहले ही विधानसभा भर्ती प्रकरण को लेकर सख्त कदम उठाने के संकेत दे चुका है। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल का पक्ष पार्टी हाईकमान ने ले लिया है।

त्रिवेंद्र रावत के दिल्ली ,प्रेमचंद के प्रभारी मुलाकात के सियासी मायने

त्रिवेंद्र रावत के दिल्ली ,प्रेमचंद के प्रभारी मुलाकात के सियासी मायने

अब पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली पहुंचने और कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के प्रभारी दुष्यंत गौतम मुलाकात के सियासी मायने तलाशने शुरू हो गए हैं। इन मुलाकात के बाद से दिल्ली से लेकर देहरादून तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सोशल मीडिया में इसको लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि उत्तराखंड में एक बार फिर सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। साथ ही प्रदेश में किसी मंत्री पर गाज गिर सकती है।

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात

उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी पेपर लीक, विधानसभा बैकडोर भर्ती, वन दारोगा भर्ती घोटाले के बीच पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से नई दिल्ली में मुलाकात हुई है, जिससे एक बार फिर सियासत गरमा गई है। नड्डा से मुलाकात करने के बाद त्रिवेंद्र ने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से पार्टी कार्यालय में भी मुलाकात की है। सूत्रों की मानें तो राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी से त्रिवेंद्र की करीब एक घंटे तक बातें हुईं हैं। पार्टी के आला नेताओं त्रिवेंद्र की मुलाकात से राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

बैकडोर भर्ती सामने आने के बाद त्रिवेंद्र खेमे के लिए दबाब की राजनीति मौका

बैकडोर भर्ती सामने आने के बाद त्रिवेंद्र खेमे के लिए दबाब की राजनीति मौका

विधानसभा में बैकडोर भर्ती सामने आने के बाद से ही पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सामने आकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। ये भर्ती प्रकरण पूर्व सीएम त्रिवेंद्र के कार्यकाल का है। लेकिन इसमें पूरा रोल स्पीकर का ही माना जा रहा है। ऐसे में त्रिवेंद्र रावत इस पूरे प्रकरण को लेकर पहले ही पल्ला झाड़कर स्पीकर रहे प्रेमचंद अग्रवाल पर पूरा ठीकरा फोड़ चुके हैं। ऐसे में इसे त्रिवेंद्र खेमे के लिए एक बार फिर से संगठन से लेकर सरकार पर दबाब की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि त्रिवेंद्र खेमा अपने विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह देने की पैरवी कर रहे हैं।

प्रेमचंद अग्रवाल की पार्टी के प्रभारी दुष्यंत गौतम से चर्चा

प्रेमचंद अग्रवाल की पार्टी के प्रभारी दुष्यंत गौतम से चर्चा

उधर वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने शासकीय आवास पर पार्टी के प्रभारी दुष्यंत गौतम से चर्चा की। हालांकि दोनों नेताओं ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन सियासी हलकों में इसके सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। विधानसभा में बैकडोर भर्ती का मामला प्रेमचंद अग्रवाल के स्पीकर रहते हुए समय का है। 72 भर्तियां नियम विरूद्ध होने का आरोप लगा है। प्रेमचंद अग्रवाल पर विधानसभा सचिव को भी नियम विरूद्ध प्रमोशन देने का आरोप लगा है। विपक्ष के निशाने पर स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ही लगातार बने हुए हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान के लिए अग्रवाल की भूमिका को स्पष्ट करने की चुनौती है।

प्रकरण के सामने आने के बाद भाजपा की मुश्किलें बढ़ी

प्रकरण के सामने आने के बाद भाजपा की मुश्किलें बढ़ी

इस प्रकरण के सामने आने के बाद एक तरफ जहां भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हैं। वहीं मीडिया में भी धामी सरकार की छवि पर विपरीत असर पड़ा है। प्रेमचंद अग्रवाल के मीडिया में दिए बयानों से भी पार्टी को किरकिरी झेलनी पड़ी है। प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। विधानसभा सचिव फोर्स लीव पर हैं। एक माह के भीतर इसकी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी जानी है। इस बीच उम्मीद लगाई जा रही हैए हाईकमान कोई बड़ा फैसला ले सकती है। जिसके लिए यही एक महिना उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि इस बीच हरिद्वार का पंचायत चुनाव भी है। ऐसे में हाईकमान भी दुविधा में माना जा रहा है।

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