Uttarakhand धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू होने के बाद से अब पुराने मामलों पर धामी सरकार की नजर, ये उठाया कदम
उत्तराखंड में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू होने के बाद से अंतरधार्मिक विवादों को लेकर एक बार फिर धामी सरकार सख्त हो गई है। ऐसे में अब गृह विभाग और पुलिस इस तरह के मामलों को लेकर पूरी तरह से सतर्क हो गया है।
उत्तराखंड में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू होने के बाद से अंतरधार्मिक विवादों को लेकर एक बार फिर धामी सरकार सख्त हो गई है। ऐसे में अब गृह विभाग और पुलिस इस तरह के मामलों को लेकर पूरी तरह से सतर्क हो गया है। अंतरधार्मिक विवादों के मामलों में भी युवतियों के अपहरण और अन्य तरह की शिकायतें आने की वजह से पुलिस इन मामलों को भी धर्म परिवर्तन के एंगल से जांच करेगी। किसी भी तरह की धार्मिक स्वतंत्रता की बात सामने आने पर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र जारी कर ऐसे मुकदमों और लिखित शिकायतों का ब्योरा मांगा है। पुलिस अब ऐसे मुकदमों की भी जांच करेगी, जिनमें नाबालिग अपहरण या गायब हो गई।

वर्ष 2018 के बाद से अब तक पूरे प्रदेश में 18 मुकदमे धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत दर्ज हुए हैं। इनमें से 11 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। जबकि, एक एफआईआर बंद की जा चुकी है। एक मामले में फाइनल रिपोर्ट लगी है और पांच की विवेचना चल रही है। सबसे ज्यादा सात मुकदमे देहरादून में दूसरे नंबर पर हरिद्वार में छह, तीसरे पर नैनीताल में तीन और उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल में एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया है।
एक नजर में उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम
- वर्ष 2018 में लागू हुआ।
- यदि कोई किसी का धर्म परिवर्तन कराना चाहता है तो उसे एक माह पहले संबंधित जिले के मजिस्ट्रेट के यहां आवेदन करना होता है।
- इसके बाद जांच की जाती है और कोई विवाद न हुआ तो अनुमति दी जाती है।
- वर्ष 2022 में अधिनियम में संशोधन के बाद में जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 50 हजार रुपये जुर्माना और 10 साल तक की सजा का प्रावधान।












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