Patwari Police उत्तराखंड देश का एकमात्र राज्य जहां लागू है राजस्व पुलिस सिस्टम, अब सरकार ने लिया बड़ा फैसला
धामी सरकार ने 6 थाने और 20 चौकियों को खोलने की मंजूरी दे दी
Patwari Police उत्तराखंड भारत का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रों में अब भी राजस्व पुलिस सिस्टम है। अंकिता हत्याकांड के बाद एक बार फिर इस व्यवस्था पर सवाल उठे तो राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है। अब सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने जा रही है। कैबिनेट ने इस व्यवस्था को खत्म करने के लिए कदम आगे बढ़ा दिए हैं।

प्रदेश के 9 जिलों में 6 थाने और 20 चौकियों को खोलने की मंजूरी
धामी सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में प्रदेश के 9 जिलों में 6 थाने और 20 चौकियों को खोलने की मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से राजस्व पुलिस को अब रेगुलर पुलिस में परिवर्तित करने जा रही है। सबसे पहले राज्य में 6 नए थाने और 20 चौकियों के लिए शासन से मंजूरी मिल गयी है। पहले चरण में पौड़ी जिले के यमकेश्वर, टिहरी जिले के छाम, चमोली जिले के घाट, नैनीताल जिले के खनस्यू, अल्मोड़ा जिले के देघाट और धौलझीना को थाना बनाया है। साथ ही प्रदेश में 20 नयी चौकियां खोलने की तैयारी भी शुरू हो गई है। जिसमें देहरादून जिले के लाखामंडल, पौड़ी जिले के बीरोंखाल, टिहरी जिले के गजा, कंडीखाल, चमीयाला, और चमोली जिले के नौटी, नारायणबगड़, उर्गम , रुद्रप्रयाग जिले के चोपता, दुर्गाधार, उत्तरकाशी जिले के संकरी, धोंतरी, नेनीताल जिले के औखलकांडा,धानाचूली, हेडाखान, धारी, अल्मोड़ा जिले के मजखाली, जागेश्वर, भैनखाल के साथ चम्पावत जिले के बाराकोट, में नई चौकियां खुलेंगी।
उत्तराखंड के 61 परसेंट इलाकों में आज भी कोई पुलिस थाना या पुलिस चौकी नहीं
अंकिता भंडारी केस के सामने आने के बाद एक फिर उत्तराखंड में लागू अंग्रेजों के जमाने के रेवेन्यू पुलिस सिस्टम पर सवाल उठने लगा है। उत्तराखंड देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां आज भी राजस्व विभाग के कर्मचारी और अधिकारी जैसे. पटवारी, लेखपाल, कानूनगो और नायब तहसीलदार आदि पुलिस का काम करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उत्तराखंड के 61 परसेंट इलाकों में आज भी कोई पुलिस थाना या पुलिस चौकी नहीं है। यानी राज्य का आधे से ज्यादा क्षेत्र उत्तराखंड पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। किसी भी तरह का अपराध होने पर पटवारी, लेखपाल, कानूनगो और नायब तहसीलदार आदि केस लिखते हैं। इनके पास न तो फोर्स होती है नहीं इन्हें पुलिसिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। जिससे कई बार अपराध होने के बाद पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता है।
2018 में हाईकोर्ट ने 6 महीने के भीतर राजस्व पुलिस की व्यवस्था को खत्म करने का आदेश दिया
1861 में पुलिस ऐक्ट लागू किया था। मैदानी इलाकों को तो पुलिसिया व्यवस्था ने अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन सुदूर कठिन पहाड़ी इलाकों को इस व्यवस्था से दूर रखा गया। साल 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद भी राज्य ने राजस्व पुलिस प्रणाली को जारी रखा गया। राजस्व पुलिस का मामला जब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंचा, तो वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने राजस्व पुलिस की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने का आदेश दिया था। जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस आलोक सिंह की खंडपीठ ने छह महीने के भीतर राजस्व पुलिस की व्यवस्था समाप्त कर सभी इलाकों को प्रदेश पुलिस के क्षेत्राधिकार में लाने का आदेश दिया था। आदेश के इतने साल बाद भी उस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। अब अंकिता हत्याकांड सामने आने और जनता के दबाव को देखते हुए धामी सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है।












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