उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी यहां से लड़ेंगे चुनाव, जानिए क्यों खास है ये सीट

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का चंपावत से चुनाव लड़ना लगभग तय

देहरादून, 18 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का चंपावत से चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद ही चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी को भी इस बारे में बता दिया गया है। इसके बाद एक से दो दिन में विधायक विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। इसके लिए भाजपा के जिला संगठन से भी प्रस्ताव तैयार करने का दावा किया जा रहा है।सीएम धामी की पहली पसंद भी चंपावत सीट ही मानी जा रही थी। सीएम बनने के बाद धामी ने पहला दौरा यहीं किया। जिसके बाद लोगों के फीडबैक और खटीमा से नजदीक होने की वजह से सीएम ये सीट सुरक्षित मान रहे हैं।

सितंबर से पहले चुनाव जीतना जरुरी

सितंबर से पहले चुनाव जीतना जरुरी

उत्तराखंड में चुनाव हारने के बाद भी भाजपा ने पुष्कर सिंह धामी को कमान सौंपी। अब धामी को 6 माह बाद विधायक का चुनाव जीतकर आना है। ऐसे में सीएम के लिए उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। सीएम धामी ने हाईकमान के सामने अपनी इच्छा जता दी है। हाईकमान ने भी सीएम के लिए सबसे सुरक्षित सीट का चयन कर चंपावत को ही फाइनल किया है। ऐसे में अब धामी का चंपावत से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। जिसकी प्रक्रिया दो से तीन दिन में होनी तय मानी जा रही है। चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी सबसे पहले सीएम के लिए सीट छोड़ने की पेशकश की थी। जिस पर अब मुहर लग चुकी है।

धामी चंपावत की मन की बात पर कर चुके हैं फोकस

धामी चंपावत की मन की बात पर कर चुके हैं फोकस

सीएम बनने के बाद सबसे पहले धामी चंपावत पहुंचे ​थे। पहले कार्यकाल में भी सीएम के रूप में छह माह की पहली पारी में उन्होंने बनबसा-टनकपुर, चंपावत, अमोड़ी, देवीधुरा, नाखुड़ा का दौरा किया। 23 मार्च को सीएम पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री बनबसा, टनकपुर, पूर्णागिरि धाम का दौरा कर चुके हैं। इतना ही नहीं इस दौरान सीएम ने चाय की दुकान पर भी लोगों के मन की बात को टटोलने की कोशिश की। जिसके बाद सीएम ने हाईकमान को अपने मन की बात भी बताई। सीएम धामी ने चंपावत पहुंचकर अपना चंपावत से खास रिश्ते का भी जिक्र किया। चंपावत सीएम के खटीमा क्षेत्र से 10 से 12 किमी की दूरी पर है। जिसका अधिकतर क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में ही बसा हुआ है। इस सीट पर पूर्व सैनिक और नेपाल बॉर्डर के लोग ज्यादा हैं। जिस वजह से सीएम के लिए ये सबसे सुर​क्षित मानी जा रही है। साथ ही यहां दो बार से भाजपा का ही विधायक चुनकर आया है। ऐसे में सीएम धामी चंपावत से ही चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं।

हरीश धामी का प्रस्ताव क्यों नहीं आया पसंद

हरीश धामी का प्रस्ताव क्यों नहीं आया पसंद

सीएम धामी के लिए भाजपा के आधे दर्जन से अधिक एमएलए अपनी सीट छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस के नाराज विधायक हरीश धामी भी धारचूला सीट से सीएम को चुनाव लड़ाने की बात कर चुके हैं। लेकिन सीएम पुष्कर सिंह धामी धारचूला से चुनाव लड़कर रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। धारचूला में भाजपा का संगठन कमजोर है। यहां से भाजपा चुनाव नहीं जीती। इसके सा​थ ही पूर्व सीएम हरीश रावत भी यहां से उपचुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में सीएम धामी के लिए धारचूला चुनाव आसान नहीं होगा।

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