यूक्रेन संकट अपडेट:उत्तराखंड के 10 छात्रों की हो चुकी है अब तक वापसी, 250 से ज्यादा फंसे, राजनीति भी शुरू
उत्तराखंड के 10 छात्रों की अब तक घर वापसी
देहरादून, 28 फरवरी। यूक्रेन में फंसे उत्तराखंड के छात्रों को वापस पहुंचाने का सिलसिला जारी है। जिससे छात्रों के परिजनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अब भी 250 से ज्यादा छात्रों की जानकारी राज्य सरकार को मिली है, जिनको घर वापस लाने की अब भी सरकार कोशिश में जुटी है। इसके लिए बड़े स्तर पर सरकार की ओर से पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस पूरे मिशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

उत्तराखंड के अब तक 10 छात्र पहुंच चुके हैं स्वदेश
यूक्रेन में फंसे उत्तराखंड के 10 छात्रों की अब तक घर वापसी हो चुकी है यूक्रेन से विशेष विमान से सबसे पहले उत्तराखंड के तीन छात्र दिल्ली पहुंचे। इसके बाद दूसरे फ्लाइट से उत्तराखंड के 7 छात्र स्वदेश लौटे हैं। इसके बाद आधिकारिक रूप से 10 छात्र उत्तराखंड लौट चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से खुद इसकी जानकारी शेयर कर रहे हैं और परिजनों से संपर्क में हैं। राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई हेल्पलाइन नंबर पर 259 छात्रों की यूक्रेन में होने की जानकारी मिल चुकी है। रविवार सुबह उत्तराखंड के जिन तीन छात्रों को स्वेदश लाया गया उनमें अदनान निवासी मंगलौर खुशी निवासी हरिद्वार और आशुतोष पाल नई दिल्ली पहुंचे थे उसके बाद उत्तराखण्ड के सात और छात्र यूक्रेन से सुरक्षित लौट आए हैं। इनमें तमन्ना त्यागी, प्रेरणा बिष्ट, शिवानी जोशी, लिपाक्षी, अताउल्लाह मलिक, मोहम्मद मुकर्रम और उर्वशी शामिल हैं। इस तरह से अब तक 10 छात्र स्वदेश लौट आए हैं। जिन परिजनों के छात्र अभी भी यूक्रेन में फंसे हैं, वे अपने बच्चों से लगातार संपर्क में हैं। इसकी सूचना भी वे मीडिया या अन्य माध्यमों से सरकार को भी दे रहे हैंं।
राज्य सरकार को लेना चाहिए सबक
इस घटना के बाद से एक सबक सीखने की भी हर तरफ चर्चा है कि आखिर राज्य सरकार के पास विदेश जाने और पढ़ाई करने वाले छात्रों का डाटा नहीं है। जो कि इस तरह की विपरीत परिस्थितियों में राज्य सरकार के काम आ सकता है। इसके लिए राज्य और केन्द्र सरकार में समन्वय की दिशा में भी मददगार साबित हो सकती थी। इसके लिए सिस्टम में बदलाव की भी आवश्यकता की मांग उठने लगी है। इसके साथ ही इस समय सोशल मीडिया भी छात्रों और परिजनों के लिए खासा मददगार साबित हो रहा है। सोशल मीडिया में यूक्रेन संकट से जुड़े कई तरह के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें अलग-अलग तरीके से छात्र अपनी समस्या को वीडियो के जरिए सामने रख रहे है। इन वायरल वीडियो को लेकर राजनीति भी होने लगी है। जिसे भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने तरीके से रख रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर भाजपा के नेता रेस्क्यू कर रहे छात्रों और उनके परिजनों के साथ ही सकारात्मक वीडियो को सोशल मीडिया के जरिए रख रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में सवाल के रेस्क्यू मिशन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार बयानबाजी ज्यादा कर रही है, जबकि इस वक्त रेस्क्यू अभियान को तेज करने की जरूरत है। केंद्र की मोदी सरकार रेस्क्यू अभियान को भी इंवेट की तरह पेश कर रही है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यूक्रेन पर रूसी हमले के कारण हजारों भारतीय नागरिकों (जिनमें सैकड़ों उत्तराखंडी भी हैं) की जान मुश्किल में पड़ी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से देश की सरकार को रूस व यूक्रेन के तनाव के बारे में पता था, लेकिन सरकार ने अपने नागरिकों की कोई सुध नहीं ली। युद्ध शुरू होने पर फंसे हुए भारतीयों की ओर से मामला उठाने पर सरकार नींद से जागी, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।












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