उत्तराखंड के मंदिरों के प्रसाद की टेस्टिंग,बदरीनाथ केदारनाथ में भोग, प्रसाद क्रय के लिए बनेगी एसओपी
तिरुपति बालाजी के प्रसाद को लेकर खड़े हुए विवाद के बाद अब पूरे देश में हिंदू धर्म से जुड़े मंदिरों और धामों में भोग प्रसाद व्यवस्था को लेकर सरकार व मंदिर समितियां अलर्ट हो गई है। देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम के साथ ही कई देवी देवताओं के प्रसिद्ध मंदिर हैं।
इनमें से बदरीनाथ, केदारनाथ धाम समेत 47 मंदिरों की व्यवस्था बद्री केदार मंदिर समिति के अधीन है। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा है कि मंदिरों में भोग-प्रसाद व्यवस्था की शुद्धता व गरिमा बनी रहनी चाहिए जिस तरह से पहले से ही चली आ रही है।

इसके लिए बीकेटीसी मंदिरों में भोग, प्रसाद, दान क्रय करने के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा। बद्री केदार मंदिर समिति का कहना है कि इसके लिए समय-समय पर मंदिरों में लगने वाले भोग व प्रसाद की गुणवत्ता व शुद्धता पर नजर रखी जाएगी। बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में प्रसाद में सूखे पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
जिसके लिए भोग सामग्री अधिकांश रूप से दानी दाताओं से प्राप्त होती है। मंदिर परिसर से बाहर प्रसाद बेचने वालों का खाद्य लाइसेंस पंजीकरण, खाद्य पदार्थ के भंडारण को लेकर कार्रवाई की जाएगी। मंदिर के लिए क्रय किए जा रहे मसाले, तेल, घी को क्रय करते समय भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण लाइसेंस, एगमार्क की संस्थाओं के लोगो के प्रमाणिकता की जांच में और अधिक सतर्कता बरतने को कहा गया है।
उत्तराखंड सरकार ने चारधाम के साथ ही बाकी प्रसिद्ध मंदिरों में भी प्रसाद की टेस्टिंग करने का फैसला लिया है। खास तौर पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के प्रसाद की लैब में टेस्टिंग करवाई जाएगी, ताकि यहां के प्रसाद की शुद्धता को लेकर किसी भी तरह का संदेह न रहे।
संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि चारधाम के अलावा बाकी प्रसिद्ध मंदिरों के प्रसाद की लैब में टेस्टिंग की जाएगी। इसका सीधा मकसद भक्तों को दिए जाने वाले प्रसाद में किसी भी तरह की मिलावट न हो इस आश्वस्त करना होगा। इस दौरान मंदिर की रसोई और मंदिर परिसर में बनने वाले प्रसाद के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री को भी देखा जाएगा।












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