नई सरकार के आने से पहले ही रोजगार का मुद्दा गरमाया, मेडिकल कॉलेज के 462 कर्मचारियों की नौकरी संकट में

462 कर्मचारियों की 31 मार्च तक सेवा समाप्त होने का खतरा

देहरादून, 16 मार्च। दून मेडिकल कॉलेज के 462 कर्मचारियों के रोजगार पर संकट गहरा गया है। ये सभी कर्मचारी कोविडकाल में आउटसोर्स के जरिए रखे गए थे। कॉलेज के प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना ने उपनल को सभी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के संबंद्ध में पत्र भेजा है। पत्र के सोशल मीडिया में वायरल होते ही कर्मचारियों में जहां हड़कंप मचा हुआ है। वहीं कांग्रेस के नेताओं ने इसे कर्मचारियों के भविष्य के साथ​ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं।

The issue of employment heated up even before the new government came. Jobs of 462 employees of medical college in trouble

आउटसोर्स में रखे गए थे कर्मचारी
प्रदेश में होली के बाद भाजपा सरकार का गठन होने जा रहा है। लेकिन सरकार गठन से पहले एक बार फिर रोजगार के मुद्दे पर जमकर हंगामा शुरू हो गया है। जिसका कारण है कोविड में आउटसोर्स में रखे गए कर्मचारियों की नौकरी खतरे में होना। प्राप्त जानकारी के अनुसार कोविडकाल में स्टाफ की कमी को देखते हुए सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में
स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्निीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, कंप्यूटर आपरेटर, वाहन चालक, वार्ड अटेंडेंट आदि को आउटसोर्स पर रखे जाने की व्यवस्था की थी। इसी कड़ी में दून मेडिकल कॉलेज में भी उपनल के माध्यम से 462 उपनल कर्मियों की नियुक्ति की गई थी। जिन्हें समय और आवश्यकतानुसार रखा गया था। लेकिन अब 31 मार्च को इन कर्मचारियों को हटाया जा रहा है।

कांग्रेस ने भाजपा को घेरा

दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ आशुतोष सयाना ने उपनल को भेजे पत्र में कहा है कि इन कर्मचारियों की सेवा 31 मार्च तक विस्तारित की गई थी, लेकिन सेवा विस्तारित न करने का अभी तक कोई स्पष्ट आदेश अभी नहीं मिला है। ऐसे में इन्हें सेवा में रख पाना संभव नहीं है। जब भी अस्पताल को कर्मचारियों की जरूरत होगी, तो इन्हीं कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी पर रखा जाएगा। प्राचार्य के इस पत्र के बाद कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। कर्मचारियों का आरोप है कि जब कोविड में जिदंगी संकट में थी तो उन्हें रखा गया उनसे काम लिया गया लेकिन अब जरुरत खत्म होते ही उन्हें हटाया जा रहा है। जो गलत है। कर्मचारियों को हटाने के आदेश की कॉपी सोशल मीडिया में भी जबरदस्त वायरल हो रही है। जिसको लेकर कांग्रेसी नेता अपने-अपने सोशल मीडिया में भड़ास निकाल रहे हैं। कुछ कांग्रेसी नेताओं ने इस प्रकरण को भाजपा सरकार के बेरोजगारों पर पहली मार बताया है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संगठन मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि एक तरफ भाजपा चुनाव में बड़े-बड़े दावे करते हैं, दूसरी तरफ सरकार आते ही युवाओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है।

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