चुनावी साल में किन-किन विभागों के कर्मचारियों को साधने की धामी सरकार की चुनौती
ऊर्जा ही नहीं शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी बढ़ा रहे धामी सरकार की मुश्किलें
देहरादून, 30 अगस्त। चुनावी साल में राज्य कर्मचारियों ने धामी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऊर्जा विभाग के कार्मिकों ने एक माह बाद भी 14 सूत्रीय मांगों को पूरा न करने पर आंदोलन शुरू कर दिया है तो दूसरी तरफ शिक्षकों ने तबादला सत्र बहाल करने के साथ ही 16 मांगे सरकार के सामने रख दी हैं। शिक्षकों के मामलों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। नहीं तो चुनावी साल में कर्मचारी राज्य सरकार की मुसीबतें बढ़ाने का काम कर सकते हैं।

एक माह बाद भी नहीं निकला हल
राज्य सरकार के वादा पूरा न करने पर प्रदेश के ऊर्जा विभाग के कार्मिकों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन को लेकर रणनीति तैयार करने के बाद कर्मचारियों ने 31 अगस्त से 21 सितंबर तक विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। इसके लिए सप्ताह में मंगलवार या शनिवार को गेट मीटिंग के साथ विरोध करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही 11 सितंबर से शाम 5 से 10 बजे तक मोबाइल बंद कर विरोध करने का भी निर्णय लिया गया है। ऊर्जा मंत्री के साथ एक माह पहले बनी सहमति के बाद भी मांगों पर शासनादेश जारी नहीं होने से विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
14 सूत्रीय है मांगे
मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक ने बताया कि बीती 27 जुलाई को हुए समझौते की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। लेकिन तीनों ऊर्जा निगम में कर्मचारियों की किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में राज्य सरकार को वादा निभाने की भी याद दिलाया गया है। उन्होंने बताया कि सभी कर्मियों ने निर्णय लिया कि मोर्चा का शांतिपूर्ण किया जाएगा। आंदोलन सोमवार से शुरू हो जाएगा। बताया कि ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा, नियमित व अन्य कर्मचारी अपने पूर्व की सेवा शर्तों की बहाली की मांग पर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री हरक सिंह की अध्यक्षता में विगत माह हुई बैठक में 14 सूत्रीय मांग पत्र पर समझौता हुआ था। समझौते के अनुरूप एक माह की अवधि पूर्ण होने पर भी कोई कार्रवाई न होने के चलते राज्य के ऊर्जा निगम मुख्यालय पर गेट मीटिंग व दूसरे तरीकों से विरोध करने का ऐलान कर चुके हैं।
शिक्षकों की स्थानांतरण सत्र बहाल करने की मांग
ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों के अलावा शिक्षक संघ ने भी राज्य सरकार से स्थानांतरण सत्र बहाल करने की मांग की है। जो कि सरकार के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने सीएम से यात्रा अवकाश बहाल करने समेत 16 मांगें रखी हैं। साथ ही सत्रांत लाभ का शासनादेश जारी करने की भी मांग की है। शिक्षकों ने स्थानांतरण सत्र बहाल करने और अंतर मंडलीय स्थानांतरण को भी इसमें शामिल करने की मांग की। माध्यमिक शिक्षा में लंबित प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक एवं प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करवाने और माध्यमिक शिक्षा में शारीरिक शिक्षा विषय को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग भी सरकार से की है।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का भी क्रमिक अनशन
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मियों का भी क्रमिक अनशन जारी है। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने आठ सितंबर से स्वास्थ्य महानिदेशालय में बेमियादी अनशन शुरू करने की चेतावनी भी दी है। संघ का आरोप है कि शासन व स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है। संघ की मांगों में लिपिक, डार्क रूम सहायक, लैब सहायक, ओटी सहायक व ड्रेसर के पदों पर पचास फीसद पदोन्नति का लाभ चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को देने, उद्यान विभाग के माली की भांति टेक्नीकल घोषित कर अगले ग्रेड वेतन 4200 रुपये करने के साथ ही नर्सेज संवर्ग की तरह पौष्टिक आहार भत्ता व जोखिम भत्ता देने की मांग भी कर रहे हैं।












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