उत्तराखंड चुनाव में 70 विधानसभा सीटों पर जाकर जनता से न्याय मांगेंगे तीर्थ पुरोहित

तीर्थ पुरोहितों का आरोप उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने और परंपराओं को ध्वस्त करने में लगी है बीजेपी की सरकार

देहरादून, 11 सितंबर। उत्तराखंड में चारधाम के तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड और चारधाम यात्रा को लेकर आंदोलनरत हैं। राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा को खुलवाने के लिए कोर्ट में मजबूत पैरवी करने का वादा किया। इसके साथ ही देवस्थानम बोर्ड को लेकर एक हाईपॉवर कमेटी बनाई है। लेकिन राज्य सरकार की इस पहल का चारधामों के तीर्थ पुरोहितों पर ज्यादा असर होता नजर नहीं आ रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा हुआ है। इसके लिए चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत समिति बनाई हुई है। जिसमें तीर्थ पुरोहितों की हक के लिए लड़ने वाले तीर्थ पुरो हितों को शामिल किया गया है। तीर्थ पुरोहितों का चुनावी साल में क्या है रणनीति और किस तरह से तीर्थ पुरोहितों का आंदोलन चलेगा। इन सभी मुद्दों पर चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत समिति के मीडिया प्रभारी आचार्य नरेश आनंद नौटियाल से वन इंडिया डॉट कॉम से ने बातचीत की।

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    उत्तराखंड चुनाव में 70 विधानसभा सीटों पर जाकर जनता से न्याय मांगेंगे तीर्थ पुरोहित
    Teerth Purohit will seek justice from the public by visiting 70 assembly seats in Uttarakhand elections

    पंडा ही नहीं स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा असर
    चारधाम के तीर्थ पुरोहितों का सबसे बड़ा मुद्दा देवस्थानम बोर्ड है। जिसको लेकर तीर्थ पुरोहित लंबे समय से आंदोलनरत हैं। देवस्थानम बोर्ड के मुद्दे पर नरेश आनंद नौटियाल ने कहा कि 2017 में धर्म के नाम पर बीजेपी ने उत्तराखंड में सरकार बनाई। इसके बाद देवस्थानम बोर्ड काला कानून लाया। जिसके जरिए बीजेपी उत्तराखंड की पुरानी परंपराओं को ध्वस्त करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि पहले देवस्थानम और बाद में कोविड के चलते तीर्थाटन बर्बाद हो गया। लेकिन सरकार चारधाम यात्रा तक शुरू नहीं कर पाई है। नरेश आनंद ने कहा कि बीजेपी सरकार उत्तराखंड में सीएम बदलने और परंपराओं को ध्वस्त करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड से हकहकूक ,पंडा पुरोहित ही नहीं सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं।

    बीजेपी ने देवस्थानम को लेकर शुरू की राजनीति
    चारधाम के मुद्दे पर हो रही राजनीति को लेकर नरेश आनंद ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेता और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मुद्दे पर सबसे पहले राजनीति शुरू की है। त्रिवेंद्र ने कहा था कि देवस्थानम बोर्ड का विरोध कांग्रेस से जुड़े लोग कर रहे हैं। जबकि देवस्थानम बोर्ड के विरोध के लिए चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत समिति में अधिकतर प्रतिनिधि बीजेपी से जुड़े रहे हैं। समिति के अध्यक्ष कृष्णकांत कोठियाल आरएसएस और बीजेपी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज तीर्थ पुरोहितों ने इस आंदोलन को देशव्यापी आंदोलन बना दिया है। जिसके बाद अब आंदोलन को देश के बड़े-बड़े संगठन समर्थन कर रहे हैं।

    देवस्थानम बोर्ड को खत्म करने वालों के साथ तीर्थ पुरोहित
    चुनाव में तीर्थ पुरोहितों के विरोध को लेकर नरेश आनंद ने कहा कि चुनाव में तीर्थ पुरोहित उनके साथ हैं जो देवस्थानम बोर्ड को खत्म करेंगें। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सबसे पहले अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस सरकार आते ही पहली कैबिनेट में इसे रद करने का वादा किया है। साथ ही मैनिफेस्टो में इसे शामिल करने की बात भी की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार के वर्तमान सीएम देवस्थानम बोर्ड को लेकर दबाब में है। बताया कि तीर्थ पुरोहितों से सरकार ने 30 अक्टूबर तक का समय मांगा है। लेकिन तब तक आचार संहिता लग जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारा हकहकूक जहां संरक्षित रहेगा, तीर्थ पुरोहित वहां रहेगा।

    जनता से चुनाव में मांगेंगे न्याय
    चुनाव में तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन का क्या फर्क पड़ेगा, इस सवाल के जवाब में नरेश आनंद ने कहा कि तीर्थ पुरोहित प्रदेश की 70 विधानसभाओं में जाकर जनता को बताएंगे कि धर्म के नाम पर सरकार बनाने वाली बीजेपी ने हमेशा पुरोहितों के साथ अन्याय किया है। साथ ही जनता को बताएंगे कि बीजेपी सरकार अगर दोबारा सत्ता में आई तो उत्तराखंड में धर्म की क्या स्थिति होगी, धर्मास्थली के क्या हालात होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में मंदिर और यात्रा बंद है, शराब की दुकानें लगातार खुली हैं। नरेश आनंद ने आरोप लगया कि बीजेपी सरकार आपदा में अवसर बना रही है।

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