तो क्या चुनावी साल में आईएमए का दबाव आएगा काम, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में मिल सकती है छूट!
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) एक्ट में छूट की कर रहा लंबे समय से मांग
देहरादून, 25 अगस्त। चुनावी साल में प्रदेश के निजी अस्पताल और डॉक्टर्स भी राज्य सरकार से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के नियमों में छूट लेने की कोशिश में जुटे हुए हैं। विधानसभा सत्र के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्यों ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से मुलाकात कर एक्ट में कुछ बदलाव करने के साथ ही 4 सूत्री मांग सौंपा है। आईएमए के सीडब्लूसी मेंबर डॉ. डीडी चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने आईएमए को भरोसा दिलाया है कि 4 सितंबर को वे आईएमए में आकर एक्ट को लेकर बड़ी घोषणा करने जा रहे हैं। डॉ. डीडी चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार को आईएमए के सदस्यों ने टेलीमेडिसन से लेकर वैक्सीनेशन सभी तरह की सुविधाओं के लिए मदद देने का वादा किया है।

2010 में लागू हुआ था एक्ट
चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने और झोलाछाप डॉक्टर्स पर कार्रवाई करने के लिए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू किया गया था। केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पारित किया था। उत्तराखंड सरकार को इस एक्ट को लागू कराने में पांच साल लग गए। वर्ष 2015 में यह एक्ट लागू किया गया। राज्य में स्वास्थ्य महकमे ने कई बार निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाने को एक्ट के तहत कार्रवाई भी की।लेकिन एक्ट में दिए गए कानून को लागू करने में सरकार सख्ती नहीं दिखा पाई। आईएमए शुरूआत से ही एक्ट के विरोध में रहा है।
पहाड़ी राज्य को मिले छूट
आईएमए का तर्क है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एक्ट में छूट देने मिलनी चाहिए। अब चुनावी साल में निजी अस्पताल और डॉक्टर्स इस एक्ट में छूट देने की मांग दोहराने लगे हैं। उत्तराखंड में आईएमए में 2500 से ऊपर डॉक्टर्स मेंबर और 1 हजार से ऊपर अस्पताल हैं। पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात किसी से छिपे नहीं है। सरकारी सिस्टम की पोल आए दिन खुलती रहती है। ऐसे में पहाड़ी राज्य में आईएमए को साथ में लेकर चलना राज्य सरकार के लिए जरुरी भी है। ऐसे में राज्य सरकार आईएमए की मांगों पर विचार कर रही है।
एक्ट में ये बदलाव चाहता है आईएमए
आईएमए सरकार से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के नियमों में 50 बेड से कम क्षमता वाले निजी अस्पतालों को छूट देने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तहत ईटीपी व एसटीपी व्यवस्था में छूट, अस्थायी पंजीकरण के नवीनीकरण के शुल्क में छूट, अग्निशमन अधिनियम को लागू करना, निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए महामारी एक्ट जारी रखने की मांग कर रहा है।
एक्ट में यह है नियम
प्रदेश के सभी जिलों में मान्यता प्राप्त एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस, बीएसएमएस, योग, नेचुरोपैथी और सोवा रिगपा के डिग्रीधारकों से संचालित संस्थानों का जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण में पंजीकरण किया जाएगा। इसके लिए उत्तराखंड क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट परिषद का गठन किया गया। सभी पंजीकृत संस्थाओं को एक्ट 2010 (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) के तहत नियमों को क्रियान्वित करना होगा। एक्ट के अनुसार सभी सरकारी, केंद्रीय, राज्य या स्थानीय निकाय स्थापित, नियंत्रित और प्रबंधन वाले संस्थानों का पंजीकरण मुफ्त होगा। प्राधिकरण संस्थाओं का पंजीकरण करने के साथ ही नियमों के उल्लंघन की शिकायतों का परीक्षण भी करेगा। संस्थानों का पंजीकरण और नवीनीकरण भी प्राधिकरण के स्तर से होगा। एक्ट में पंजीकरण कराने के लिए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को अपने कर्मचारियों की भी पूरी डिटेल और सेवाओं के बारे में पूरा ब्यौरा देना होता है। साथ ही बेड के अनुरूप सुविधाओं के बारे में भी बताना होता है। एक्ट में बिना पंजीकरण के संस्थान संचालित करने वालों पर जुर्माने का प्राविधान भी है।












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