Shri Krishna Janmashtami : गोपीनाथ मंदिर, यहां भगवान शंकर की गोपी रूप में होती पूजा

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर या उनकी लीलाओं से जुड़े मंदिरों में दर्शन करने जरुर जाते हैं। इसके साथ ही मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर खास आयोजन होते हैं। जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर या उनकी लीलाओं से जुड़े मंदिरों में दर्शन करने जरुर जाते हैं। इसके साथ ही मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर खास आयोजन होते हैं। जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। ऐसे ही उत्तराखंड के एक ऐतिहासिक और हिंदू आस्था के प्रतीक मंदिर का भगवान बिष्णु से खास संबंध है।

 Shri Krishna Janmashtami: Gopinath Temple, here Lord Shankar is worshiped in the form of Gopi.

चमोली जिले का गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर भगवान शंकर की पूजा गोपी रूप में होती है। यहां भगवान शंकर गोपी रूप में श्रृंगार मग्न रहते हैं। यह उत्तराखंड का सबसे ऊंचा मंदिर है। यह मंदिर अपनी अलग वास्तुकला के लिए जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर का शीर्ष गुम्बद और इसका 30 फुट का गर्भ गृह है।

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    Shri Krishna Janmashtami : गोपीनाथ मंदिर, यहां भगवान शंकर की गोपी रूप में होती पूजा

    गोपीनाथ मंदिर पंच केदारों में से चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ का गद्दी स्थल है। मंदिर को लेकर कई किवदंतियां हैं, जिसमें कि एक यह भी है कि भगवान श्रीकृष्ण जब यहां रासलीला कर रहे थे, तब भगवान शिव गोपी का रूप धारण कर रासलीला में शामिल हो गए। लेकिन कृष्ण ने भगवान शिव को पहचान लिया और उन्हें कहा कि आप तो गोपियों के नाथ है, तब से इस स्थान का नाम गोपीनाथ पड़ा। मंदिर परिसर में बेहद पुराना त्रिशूल मौजूद है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस त्रिशूल को आकाश भैरव का त्रिशूल कहा गया है।

    गोपीनाथ अथवा रुद्रनाथ के नाम से प्रसिद्ध यह शिव मंदिर बद्रीनाथ तथा केदारनाथ के प्राचीन यात्रा मार्ग पर स्थित गढ़वाल क्षेत्र के सर्वाधिक विशाल तथा ऊंचे मंदिरों में से एक है। मंदिर प्रांगण में भगवान गणेश, हनुमान और अनुसूया कथा नवदुर्गा का मंदिर भी स्थित है। यह एक ऐसा मंदिर है, जहां शिव को विष्णु के रूप में भी पूजा जाता है और यही का कारण है कि विष्णुसहस्त्र नाम के साथ-साथ रुद्राभिषेक भी किया जाता है।

    शीतकाल के दौरान जब भगवान रुद्रनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं तब शिव भक्तों को भगवान रुद्रनाथ के दर्शन उनके चल विग्रह के रूप में गोपी नाथ मंदिर में ही होते हैं। शीतकाल के दौरान भगवान रुद्रनाथ का चल विग्रह गोपीनाथ मंदिर में विराजित रहता है।

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