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Shankaracharya ऐतिहासिक शीतकालीन चार धाम यात्रा का शुभारंभ, हरिद्वार से गंगा पूजन के साथ शुरू

चार धाम यात्रा के इतिहास में पहली बार शंकराचार्य की शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ हो गया है। आज हरिद्वार से
गंगा पूजन के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शीतकालीन चारधाम यात्रा का शुभारंभ किया। आदिगुरु शंकराचार्य परंपरा के इतिहास में यह पहला अवसर है जब ज्योतिषपीठ के आचार्य चारधामों के पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा कर रहे हैं।

 Shankaracharya Jyotishapeeth Swami Avimukteshwarananda Saraswati launches winter Char Dham Yatra, begins with Ganga puja from Haridwar

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आज बुधवार से उत्तराखंड के चारधामों की शीतकालीन तीर्थ यात्रा की शुरुआत कर दी है। यात्रा के दौरान यात्रा मार्गों पर उनका भव्य स्वागत किया जा रहा है। बड़कोट नगर क्षेत्र में उनका अभिनंदन व भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद सबसे पहले वह मां यमुना के शीतकालीन पूजा स्थल खरसाली पहुंचेंगे।

जहां सायंकालीन पूजा और आरती में शामिल होंगे। गुरुवार को शंकराचार्य उत्तरकाशी के लिए प्रस्थान करेंगे। इतिहास में यह पहला अवसर है जब ज्योतिषपीठ के आचार्य चारधामों के पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि उनकी तीर्थ यात्रा से चारधामों में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

शीतकालीन चारधाम यात्रा 28 व 29 दिसंबर को उत्तरकाशी, 30 दिसंबर को भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा स्थली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर, 31 दिसंबर को बद्रीकाश्रम हिमालय, एक जनवरी को ज्योतिर्मठ और दो जनवरी को हरिद्वार में रात्रि-विश्राम करेंगे। उत्तराखंड ही नहीं देश के इतिहास में पहली बार कोई शंकराचार्य इस यात्रा पर निकलेंगे। इसके पीछे वजह शीतकाल चार धाम यात्रा को बढ़ावा देना भी माना जा रहा है।

हिंदू मान्यता के अनुसार शीतकाल के छह मास उत्तराखंड के चार धामों में देवता पूजा पाठ करते हैं। जिस वजह से बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री चारों धाम के कपाट बंद हो जाते हैं। इस दौरान मां गंगा उत्तरकाशी जिले के मुखवा गांव और यमुना मां खरसाली में विराजमान होती हैं। बाबा केदार रूद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ और भगवान बदरी विशाल पांडुकेश्वर जोशीमठ चमोली में आ जाते हैं।

जहां 6 माह शीतकाल में पूजा अर्चना होती है। यहां पर भी श्रद्धालु शीतकाल में भी इन स्थानों पर होने वाली पूजा-अर्चना में शामिल हो सकते हैं। लेकिन अभी तक कई बार पहल होने की वजह से भी शीतकाल चार धाम यात्रा परवान नहीं चढ़ी। इसके पीछे वजह संसाधनों की कमी और मौसम अनुकूल न होना भी है।

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