राजस्थान से मिली कर्मचारियों को संजीवनी, पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सड़क से सोशल मीडिया पर चलेगा आंदोलन
उत्तराखंड में कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
देहरादून, 25 फरवरी। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुरानी पेंशन की मांग को बहाल करने के बाद से प्रदेश के कर्मचारियों को संजीवनी मिल गई है। इसके लिए अब राज्य कर्मचारियों ने व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाने और सोशल मीडिया पर भी विशेष मुहिम चलाने का ऐलान कर दिया है। जिससे केन्द्र और भाजपा शासित राज्यों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इधर प्रदेश में नई सरकार के गठन से पहले उत्तराखंड में राज्य कर्मचारियों के आंदोलन के मूड से भी आने वाले दिनों में मुश्किलें खड़ी होना तय है।

कर्मचारियों ने दी चेतावनी
उत्तराखंड में भी 80 हजार से ज्यादा कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। बीच में चुनाव और आचार संहिता के चलते मामला टाल दिया गया था। जो कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अपने प्रदेश में बहाल करने के बाद फिर से गरमा गया है। प्रदेश के कर्मचारी अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक इस मामले को फिर से आंदोलन करने का ऐलान कर चुके हैं। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन (एनएमओपीएस) उत्तराखंड ने इस मामले में आंदोलन का रास्ता अपनाने का ऐलान कर दिया है। उत्तराखंड में भी एक अक्टूबर 2005 के बाद से नई पेंशन स्कीम योजना लागू है। यहां कर्मचारी संगठन लगातार पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे हैं। एनएमओपीएस उत्तराखंड के अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली ने कहा कि राजस्थान की तर्ज पर अन्य राज्यों की सरकारों को भी इस मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 80 हजार कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल होने का इंतजार है। नई सरकार का गठन होते ही आंदोलन तेज कर सरकार पर इसके लिए दबाव बनाया जाएगा। इससे पहले सोशल मीडिया के जरिए मुहिम चलाई जाएगी।
नई सरकार के लिए कर्मचारियों को साधने की चुनौती
प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस शासित राज्यों के समर्थन के बाद प्रदेश में भी कांग्रेस सरकार आने पर पुरानी पेंशन बहाल करने का दावा किया जा रहा है। इसके लिए कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में किए गए वादे को दोहरा रही है। कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राजस्थान सरकार और अशोक गहलोत के निर्णय का स्वागत किया है। साथ ही भरोसा दिलाया है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर पुरानी पेंशन को बहाल कर दिया जाएगा। हालांकि पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर भाजपा की ओर से कोई बयान जारी नहीं हुआ है। जिससे कर्मचारियों में रोष भी है। जो कि भाजपा के लिए आने वाले दिनों में मुश्किल भी खड़ी कर सकता है।
आखिर क्या है विवाद
वर्ष 2004 से पहले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम के तहत रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित पेंशन मिलती थी। यह पेंशन रिटायरमेंट के समय कर्मचारी के वेतन पर आधारित होती थी। इस स्कीम के तहत रिटायर्ड कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिजनों को भी पेंशन का प्रावधान था। अटल बिहारी वाजपेई की भाजपा सरकार ने अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम को बंद कर दिया था। और नई पेंशन योजना लागू की गई थी। इसके बाद राज्यों ने भी नई पेंशन योजना को अपना लिया। जिसका करीब 1 साल से विरोध प्रदर्शन चल रहा है।












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