Sai Jadhav जानिए कौन और कहां की हैं 23 साल की पहली महिला आर्मी अफसर, रच दिया 93 साल का IMA का इतिहास

Sai Jadhav महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली साई जाधव ने टेरिटोरियल आर्मी की पहली महिला लेफ्टिनेंट बनकर इतिहास रच दिया है। 93 साल के देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में पहली बार किसी महिला अधिकारी कैडेट ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया है।

उन्होंने प्रादेशिक सेना (Territorial Army) के विशेष कोर्स के तहत सख्त ट्रेनिंग पूरी की और अब वह लेफ्टिनेंट बन चुकी हैं। साई जाधव का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा और SSB इंटरव्यू पास करने के बाद हुआ था। उन्होंने IMA में 6 महीने का सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।

Sai Jadhav more about 23-year-old first female army officer where she from who made history 93 IMA Indian Military Academy

लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) वर्षों से देश को सैन्य अधिकारी दे रही है। इस अकादमी के लिए यह पासिंग आउट परेड (POP) ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं थी। IMA से ट्रेनिंग पूरी करके पहली महिला अधिकारी कैडेट बनकर लेफ्टिनेंट साई जाधव ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने प्रादेशिक सेना (Territorial Army) के लिए निर्धारित 6 महीने का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया और लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।

16 ऑफिसर कैडेट्स में अकेली महिला थीं

साई जाधव ने IMA के रेगुलर कोर्स में नहीं, बल्कि प्रादेशिक सेना के विशेष प्रशिक्षण कोर्स के तहत ट्रेनिंग पूरी की। वह इस कोर्स में शामिल 16 ऑफिसर कैडेट्स में अकेली महिला थीं। पासिंग आउट सेरेमनी में उनके माता-पिता ने उनके कंधे पर लेफ्टिनेंट के स्टार लगाए। हालांकि, उन्होंने अन्य कैडेट की तरह मुख्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) में मार्च पास्ट नहीं किया, लेकिन वह प्रादेशिक सेना के छह माह विशेष के कोर्स के तहत आइएमए में कड़े सैन्य प्रशिक्षण से गुजरीं।

आर्मी परिवार की बेटी

वह आर्मी परिवार की बेटी हैंं। साई जाधव के परिवार का सेना से जुड़ा इतिहास है। साई जाधव के पिता संदीप जाधव भारतीय सेना में मेजर हैं। उनके दादा ने ब्रिटिश सेना में देश की सेवा की थी। इस कार्यक्रम के दौरान घोषणा की गई कि जून 2026 से महिला अधिकारी कैडेट्स नियमित रूप से पुरुष कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर IMA में ट्रेनिंग लेंगी और पासिंग आउट परेड में भी हिस्सा लेंगी।

आइएमए का प्रशिक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण

उन्होंने बताया कि आइएमए का प्रशिक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन इसी कठिन दौर ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया। साई के अनुसार, आइएमए ने उन्हें न सिर्फ एक बेहतर अधिकारी, बल्कि आत्मविश्वासी व्यक्तित्व भी दिया।साई ने स्कूल और कालेज की छात्राओं को संदेश दिया कि वे रक्षा बलों की ओर आगे बढ़ें। यह न केवल एक बेहतरीन करियर है, बल्कि देशसेवा का सबसे गौरवपूर्ण और सम्मानजनक माध्यम भी है।

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