Chaurasi Kutiya बनेगा हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन, चौरासी कुटिया और बीटल्स आश्रम नाम के पीछे है दिलचस्प कहानी
ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम स्थित ऐतिहासिक स्थल चौरासी कुटिया को उत्तराखंड की धामी सरकार हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने जा रही है। चौरासी कुटिया को बीटल्स आश्रम के नाम से भी जाना जाता है।
ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम स्थित ऐतिहासिक स्थल चौरासी कुटिया को उत्तराखंड की धामी सरकार हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने जा रही है। चौरासी कुटिया को बीटल्स आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। इसके लिए एचसीपी डिजाइन मैनेजमेंट कंपनी मास्टर प्लान तैयार करेगी। चौरासी कुटिया राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में होने से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी अनुमति ली जाएगी।

योग नगरी ऋषिकेश में बीटल्स आश्रम देश और विदेशी पर्यटकों के लिए सबसे खास जगह है। बीटल्स आश्रम, चौरासी कुटिया गंगा नदी के किनारे स्थित है। इस कुटिया का निर्माण सन् 1961 में महर्षि महेश योगी द्वारा किया गया है। बताया जाता है कि 60 के दशक का प्रसिद्ध बीटल्स बैंड यहां ध्यान की खोज में पहुंचा।
बीटल्स' ब्रिटेन स्थित एक विश्व प्रसिद्ध 'पॉप बैंड ग्रुप' था। बीटल्स बैंड के जॉन लेनन, पॉल मैक कार्टनी, जॉर्ज हैरिसन रिंगो स्टार सहित 1968 में ऋषिकेश आकर महर्षि महेश योगी के इस आश्रम में रुके थे। बीटल्स बैंड के यहां आने की वजह से चौरासी कुटिया बीटल्स आश्रम के नाम से भी जानी जाती है। यहां बने भवन आज भी वास्तु कला के अद्भुत नमूने हैं, जो उस वक्त जापान की तकनीकी पर बनाए गए थे। यह सभी भवन और कुटिया भूकंपरोधी हैं।
वर्ष 1961 में महर्षि महेश योगी ने राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 7.5 हेक्टेयर वन भूमि में चौरासी कुटिया आश्रम का निर्माण किया था। उन्होंने करीब 40 वर्षों के लिए वन भूमि को लीज पर लिया था। इस दौरान उन्होंने आश्रम में 140 गुंबदनुमा कुटिया और 84 छोटी-छोटी ध्यान योग की कुटिया व अन्य निर्माण किया था।
वर्ष 1968 में इंग्लैंड का मसहूर बीटल्स ग्रुप के चार सदस्य जॉन लेनन, पॉल मकार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार चौरासी कुटिया में ध्यान, योग करने के लिए आए थे। वे यहां करीब चार महीने रुके थे। इन चार महीनों में उन्होंने यहां 40 गानों की धुन तैयार किया था, जिन्हें विदेशी आज भी मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं।
वन भूमि की लीज समाप्त होने के चलते महर्षि महेश योग इस कुटिया को वर्ष 1989 में छोड़कर हॉलैंड चले गए। वर्ष 2000 में वन विभाग ने इस आश्रम को अधिग्रहण कर लिया। आठ दिसंबर 2015 को पार्क प्रशासन ने इस कुटिया को देशी, विदेशी पर्यटकों के लिए खोल दिया। यह विरासत पिछले छह वर्षों में राजाजी टाइगर रिजर्व के खजाने में 2.33 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी दे चुकी है।
बीटल्स आश्रम के भ्रमण के दौरान किचन, महर्षि की कुटिया, पोस्ट ऑफिस, कमरें देखने को मिल जाएंगे। यहां पर्यटकों को एंट्री शुल्क देना होता है। भारतीयों के लिए 150 रूपये, विदेशियों के लिए 600 रूपये और अगर आप विद्यार्थी है तो आपको 75 रूपये एंट्री चार्ज देना होगा।
बीटल्स आश्रम सुबह 10 बजे से 4 बजे तक ही खुलता है। लेकिन रखरखाव और देखरेख की कमी के चलते अब ये खंडहर होते जा रहे हैं। बीटल्स हॉल समेत विभिन्न भवनों और कुटियाओं की छतें टूट चुकी है। जिस वजह से सरकार ने इसे हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।












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