ऋषिकेश को क्यों कहा जाता है योगनगरी और विश्व योग की नगरी, जानिए इसका पौराणिक महत्व
विश्व की योग की राजधानी के नाम से विख्यात ऋषिकेश
देहरादून, 21 जून। आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। हर कोई योग के महत्व और योग से होने वाले लाभ को समझा रहे हैं। योग का उत्तराखंड से खास महत्व है। जिस जगह योग की शुरूआत मानी जाती है और जहां योग के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है, वह उत्तराखंड है और योग नगरी के अलावा विश्व की योग की राजधानी के नाम से विख्यात ऋषिकेश उत्तराखंड में ही है। आइए जानते हैं कि ऋषिकेश का महत्व क्या है और इसे योग नगरी क्यों कहा जाता है।

क्या है ऋषिकेश का महत्व
ऋषिकेश देहरादून जिले में आता है। जो कि हिमालय पर्वत की तलहटी में समुन्द्रतल से 409 मीटर की ऊंचाई पर स्थित और शिवालिक रेंज से घिरा हुआ है। हिमालय की पहाड़ियां और प्राकर्तिक सौन्दर्यता से ही इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी ऋषिकेश को अतुल्य बनाती है। ऋषिकेश के आश्रमों में बड़ी संख्या में देश विदेश से तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शांति के लिए आते है। यहां योग और साधना सबसे ज्यादा की जाती है। यहां पर वशिष्ठ गुफा, लक्ष्मण झूला और नीलकंठ मंदिर आदि ऋषिकेश के प्रमुख पर्यटन स्थल है। ऋषिकेश दो शब्दों के संयोजन से बना है , ऋषिक और एश। ऋषिक का अर्थ है इन्द्रिया और एश का अर्थ है भगवान या गुरु। जानकारों की मानें तो 1960 के दशक में बीटल्स ऋषिकेश के पास योग का अध्ययन करने के लिए आया था। तब से इसे योग नगरी कहा जाने लगा। ऋषिकेश चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ का प्रवेश द्वार है। यहीं से चारधाम यात्रा की शुरूआत होती है।
क्या कहती हैं पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार ऋषिकेश में एक प्रसिद्ध संत रिहाना रिशी का निवास स्थान था। उन्होंने गंगा नदी के किनारे तपस्या करी। जिसके कारण इनाम स्वरुप भगवान विष्णु ऋषिकेश के रूप में संत रिहाना रिशी के समक्ष उपस्थित हुए। इस वजह से इस स्थान को ऋषिकेश का नाम दिया। यह भी माना जाता है कि ऋषिकेश पौराणिक केदारखंड का भाग है। इस स्थान में भगवान राम ने रावण को मारने के लिए घोर तपस्या करी थी। श्री राम के भाई लक्ष्मण ने गंगा नदी को एक विशेष बिंदु पर पार करा था। जो की लक्ष्मण झुला के नाम से विख्यात है। एक और पौराणिक कथा के अनुसार दूसरी कहानी कहती है कि भरत भगवान राम के भाई ने इस स्थान पर तपस्या की , जिसके बाद ऋषिकेश में भरत मंदिर बनाया गया। साथ ही यह भी कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिव ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना गया। और इसी कारण ऋषिकेश में भगवान शिव की महिमा की वजह से नीलकंठ मंदिर स्थापित किया गया।
साल भर यहां मिलते हैं साधक और योगी
पौराणिक कथाओं के अलावा भी ऋषिकेश की बात करें तो यहां गंगा के किनारे हर जगह आश्रम, होटल और अन्य स्थानों पर साधु संत, विदेशी, तीर्थ यात्री योग और साधना करते हुए नजर आ जाते हैं। यह स्थान योग, साधना के लिए सबसे उपयुक्त है। यहां पर सालों से ऋषि, मूनि, साधु, संत योग और साधना करते आ रहे हैं। यहां सालभर गंगा के तटों और आश्रमों में योग और साधना करते हुए नजर आ जाते हैं। इसी वजह से ऋषिकेश विश्व मानचित्र पर प्रसिद्ध है। सालों से इसे योगनगरी के नाम से पहचाना जाता है। परमार्थ निकेतन योग और साधना के लिए सबसे प्रसिद्ध है।












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