Rahul Gandhi Kedarnath Yatra: बाबा केदार की शरण में राहुल गांधी, आस्था या पॉलिटिकल गेम, जानिए
भाजपा को चुनावों में हिंदूत्व कार्ड ही जातिगत वोट बैंक की काट नजर आता है। जबकि कांग्रेस या यूं कहें पूरा विपक्ष भाजपा के हिंदूत्व कार्ड को जातिगत ध्रुवीकरण मानता है। इन सबके बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंदिरों में माथा टेक कर हिंदूओं में पैठ बनाते हुए नजर आते हैं। ऐसे में राहुल गांधी की केदारनाथ में तीन दिन की यात्रा आस्था से जुड़ी हो सकती है। लेकिन राजनीतिक गलियारे में इसको पॉलिटिकल गेम की तरह माना जा रहा है।

5 राज्यों में विधानसभा चुनावों के गहमागहमी के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आज से तीन दिन तक केदारनाथ यात्रा पर पहुंच रहे हैं। राहुल गांधी की इस केदारनाथ यात्रा को पार्टी ने निजी यात्रा बताते हुए दूरी बनाने की अपील की है। इस दौरान राहुल गांधी केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों और पंडा समाज से बातचीत कर सकते हैं। साथ ही केदारनाथ पुर्ननिर्माण कार्यों की भी जानकारी ले सकते हैं।
राहुल गांधी की केदारनाथ यात्रा से स्थानीय पुरोहित और पंडा समाज भी काफी उत्साहित नजर आ रहा है। केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी का कहना है कि राहुल गांधी केदारनाथ आपदा के बाद भी पैदल केदारनाथ यात्रा पर आए थे। ऐेसे में उनका पंडा समाज पूरे जोश और उत्साह के साथ स्वागत किया जाएगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी आज केदारनाथ पहुंच रहे हैं। रविवार को वे दिल्ली से देहरादून एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद हेलिकॉप्टर से केदारनाथ रवाना हो जाएंगे, जहां वह तीन दिन रहेंगे। यह उनकी निजी और आध्यात्मिक यात्रा बताई गई है। इस यात्रा में राहुल को कोई भी कांग्रेसी नेता मिलने नहीं पहुंचेंगे।
केदारनाथ में बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल राहुल की अगुवानी करेंगे। गणेश गोदियाल पहले ही केदारनाथ पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा ले चुके हैं। इस बीच राहुल गांधी दो रात केदारनाथ में रहकर समय बिताएंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं अन्य दिनों की तरह चलती रहेंगी। श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए राहुल गांधी मंदिर परिसर से हटकर एक विशेष स्थान पर रुकेंगे।
5 राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की केदारनाथ यात्रा को खास माना जा रहा है। ये बात अलग है कि राहुल की यात्रा को कांग्रेस निजी यात्रा मान रही है। लेकिन चुनाव के बीच केदारनाथ पहुंचने को राहुल की यात्रा के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। राहुल गांधी वर्ष 2013 की आपदा के बाद भी केदारनाथ धाम आ चुके हैं। उस दौरान उन्होंने पैदल ही केदारनाथ की यात्रा की थी।
पीएम मोदी और राहुल गांधी की इन आध्यात्मिक यात्राओं को लेकर नई बहस भी छिड़ी हुई है। भाजपा और कांग्रेस अपने अपने नेताओं के धार्मिक यात्राओं का सियासी लाभ लेने में जुटी हुई है। जिसका लाभ चुनावों में मिलने की दोनों सियासी दलों को उम्मीद है।
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि जिस तरह पीएम मोदी ने पिथौरागढ़ से चुनावी शंखनाद किया और आदि कैलाश और जागेश्वर धाम आदि स्थलों की धार्मिक यात्रा की। कांग्रेस उसका तोड़ तलाशने के लिए भी राहुल गांधी की केदारनाथ यात्रा का चुनाव में लाभ ले सकती है।
राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक चश्मे से देखने के पीछे भाजपा का कहना है कि जो स्टालिन के सनातन को खत्म करने के बयान के पर चुप्पी साधते हैं कि उनकी केदारनाथ में आस्था है, ये विश्वास कैसे किया जा सकता है।
भाजपा राहुल गांधी की केदारनाथ यात्रा को लेकर भी सवाल उठाने लग गई है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान का कहना है कि जो सनातन विरोधी कार्य राहुल गांधी ने किए हैं। वे केदारनाथ आकर उनका पश्चाताप करने आ रहे हैंं।












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