उत्तराखंड की धामी सरकार के 3 नए कानून, जो बने देश के लिए मिसाल

राज्य सरकार ने धर्मांतरण कानून, नकल विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता को लेकर उठाए गए कदम से कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ अब तक के सबसे सख्त कानून बनाकर दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण भी पेश ​किया है।

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उत्तराखंड में धामी सरकार ने अपने कार्यकाल में 3 बड़े फैसले लेकर पूरे देश में अन्य राज्यों के लिए मिसाल पेश की है। राज्य सरकार ने धर्मांतरण कानून, नकल विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता को लेकर उठाए गए कदम से एक तरफ कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ अब तक के सबसे सख्त कानून बनाकर दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण भी पेश ​किया है।

धर्मांतरण विरोधी कानून
उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून उत्तरप्रदेश से भी सख्त है। प्रदेश में जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने या करने पर अब 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। राज्यपाल ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद अब अधिनियम राज्य में प्रभावी हो गया है। कानून में जो प्राविधान किए हैं, उसके अनुसार जबरन, लालच देकर या धोखे से किसी भी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराना जुर्म होगा। ऐसा करने का दोषी पाए जाने पर उसे 10 साल तक की कैद हो सकती है। नए कानून में 50 हजार के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, धर्मांतरण कराने का दोषी पाए जाने वाले को पांच लाख रुपये तक पीड़ित को देने होंगे। उत्तराखंड में 2018 में यह कानून बनाया गया था। उसमें जबरन या प्रलोभन से धर्मांतरण पर एक से पांच साल की सजा का प्रावधान था।

नकल विरोधी कानून

उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू हो गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश, 2023 पर मुहर लगा दी है। अब भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल कराने या अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिलेगी। साथ में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना भी देना पड़ेगा। इस गैर जमानती अपराध में दोषियों की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। अध्यादेश में संगठित होकर नकल कराने और अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने वाले मामलों में आजीवन कैद की सजा तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान है। इसके साथ ही आरोपियों की संपत्ति भी जब्त करने की व्यवस्था इसमें की गई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में शुचिता और निष्पक्षता को लेकर सरकार संकल्पबद्ध है। उत्तराखंड ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू कर दिया है।

समान नागरिक संहिता

उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनेगा जो समान नागरिक संहिता लागू करने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 27 मई 2022 को राज्य में समान नगारिक संहिता के परीक्षण एवं क्रियान्वयन के लिए जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सेनि.) की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। (यूसीसी) की ड्राफ्ट रिपोर्ट मई 2023 तक आएगी। उत्तराखंड में भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ता में आने पर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान किया था। बीते 27 मई को सरकार ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ,सेवानिवृत्त, की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया। समिति में न्यायाधीश,सेवानिवृत्त, प्रमोद कोहली, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति डा सुरेखा डंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़ एवं सदस्य सचिव अजय मिश्रा शामिल हैं। यह समिति मौजूदा कानून में संशोधन करने के साथ ही विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार व उत्तराधिकार से संबंधित मामलों का भी अध्ययन कर रही है।

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