सिलक्यारा पर सियासत, रैट होल माइनर्स को कांग्रेस के विधायक देंगे अपने एक माह का वेतन, भाजपा पर लगाए ये आरोप
ऑपरेशन सिलक्यारा पूरा होने के बाद अब सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस ने जहां सत्तापक्ष पर सवालों की बौछार शुरू कर दी है। वहीं भाजपा ने सिलक्यारा टनल हादसे की जांच होने तक कांग्रेस नेताओं से सब्र रखने का आग्रह किया है।

देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत पार्टी के तमाम अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सिलक्यारा टनल हादसे को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि सिल्कयारा टनल से मजदूरों को बाहर निकालने के बाद मुख्यमंत्री खुद सारा श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं और इस घटना को ईवेंट के तौर पर पेश कर रहे हैं, जबकि जिन 'रैट होल माइनर्स' और बचाव कार्यों में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन रात मेहनत करी उनको सरकार ने पीछे कर दिया। जो कि गलत है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार को सिल्कयारा टनल हादसे से सबक लेना चाहिए और पहाड़ों में अंधाधुंध निर्माण कार्यों से बचते हुए हिमालय को बचाने पर भी ध्यान देना चाहिए। हरीश रावत ने इस दौरान मजदूरों को बाहर निकालने के लिए 'रैट होल माइनर्स' की जमकर सराहना भी की। साथ ही उन्होने बताया कि पार्टी ने निर्णय लिया है कि सभी विधायक अपने एक एक माह का वेतन देने के साथ ही पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी इन रैट होल माइनर्स के लिए आर्थिक योगदान देंगे।
पार्टी ये धनराशि रैट होल माइनर्स को सम्मान के तौर पर देगी। वही पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अब तक संबंधित कंपनी पर कार्रवाई ना करने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होने ऐलान किया कि भले ही वो विधायक नहीं है। लेकिन फिर भी वह मौजूदा विधायक की भांति अपना एक माह का वेतन रैट होल माईनर्स को सम्मान के तौर पर देंगे।
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग मे 17 दिन तक चले रेस्क्यू आपरेशन के दौरान तमाम तरह की तकनीकी खामिया गिनाने और सरकार को कोसने मे लगी कांग्रेस की चेतना आखिरकार जाग गयी यह सुखद है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि बेहतर होता कि कांग्रेस रेस्क्यू आपरेशन के समय संयम और गैर जिम्मेदाराना रवैया नही अपनाती तो बेहतर होता। इस दौरान वह टनल को लेकर तकनीकी दक्षता का भी प्रदर्शन भी करने मे पीछे नही रही। कांग्रेस मजदूरों के बाहर निकलने की चिंता कम और इसे अवसर मानकर राजनैतिक समीक्षा मे जुट गयी।












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